कोटा : कोटा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शिवपुरी धाम के महंत सनातनपुरी महाराज का निधन हो गया।
पिछले 10 दिनों से जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
रविवार देर रात उन्हें वापस कोटा लाया गया, जहां उन्होंने आश्रम में अंतिम सांस ली। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवपुरी धाम पहुंच रहे हैं।

आश्रम के सेवादार आकाश ने बताया- महाराज जी कुछ समय से अस्वस्थ थे। उन्हें लिवर और किडनी संबंधी समस्याएं थीं, जिसके चलते उनका इलाज जयपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।
हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें कोटा लाया गया, जहां आश्रम पहुंचने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।

थेकड़ा स्थित शिवपुरी धाम के महंत सनातनपुरी महाराज संरक्षक के रूप में सेवा कर रहे थे।
नागा बाबा राणा रामपुरी के शिष्य थे
महंत सनातनपुरी महाराज, नागा बाबा राणा रामपुरी के शिष्य थे। थेकड़ा स्थित शिवपुरी धाम के संरक्षक के रूप में सेवा कर रहे थे।
शिवपुरी धाम में 525 शिवलिंग स्थापित हैं, जो कोटा क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है।

2007 में 111 कुंडीय महायज्ञ के साथ 525 शिवलिंगों की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। महंत सनातनपुरी महाराज ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
525 शिवलिंग स्थापना में निभाई थी भूमिका
नागा बाबा राणा रामपुरी 1985 में कोटा आए थे और पुलिया के पास धूना लगाया था। बाद में उन्होंने 525 शिवलिंगों की स्थापना का संकल्प लिया।
राणा रामपुरी के देहांत के बाद इस कार्य की जिम्मेदारी सनातनपुरी महाराज ने संभाली।
सनातनपुरी महाराज के नेतृत्व में 2007 में 111 कुंडीय महायज्ञ के साथ 525 शिवलिंगों की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई और धाम को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित किया गया।

महाराज की अंतिम दर्शन यात्रा मंदिर से निकाली गई, उनके दर्शन के लिए भक्त पहुंच रहे हैं।
2022 से खराब चल रहा था स्वास्थ्य
महाराज सनातनपुरी महाराज के लिवर में गांठ हो गई थी। साल 2022 में उनके लिवर की गांठ को निकाला गया था। उसके बाद से उनका स्वास्थ खराब रहने लगा था। लेकिन इसके बाद भी वह सनातन धर्म के कामों में पीछे नहीं रहते थे।
मंदिर में सेवा पूजा के साथ साथ धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति लगातार बनी रहती थी। पिछले दस दिन पहले से उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। जिसके बाद कोटा में इलाज के बाद जयपुर ले जाया गया था।
जयपुर में निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। लेकिन रविवार देर रात डॉक्टर्स ने भी उन्हें आश्रम में ले जाकर ही सेवा करने की बात कही। इसके बाद उन्हें कोटा आश्रम लाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से की थी मुलाकात
जनवरी आखिर में बागेश्वार धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री कोटा पहुंचे थे।
धीरेंद्र शास्त्री कोटा के जवाहर नगर इलाके में अपने एक भक्त के आवास पर पहुंचे थे। जहां उन्होंने सनातनपुरी महाराज से भेंट की थी।
इस दौरान दोनों के बीच सनातन धर्म को लेकर चर्चा हुई थी। सनातन पुरी महाराज ने कहा था कि सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करते रहो। धीरेंद्र शास्त्री ने उनका आर्शीवाद लिया था।

