श्रीगंगानगर/जोधपुर : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(RBSE) ने मंगलवार को 12वीं का रिजल्ट जारी किया। श्रीगंगानगर में छात्रा की मौत के 10 दिन बाद आए रिजल्ट को देखकर मां फफककर रो पड़ीं। बेटी की तस्वीर को सीने से लगाकर बोलीं- नकिता शुगर की पेसेंट थी। इंसुलिन का इंजेक्शन लेकर परीक्षा देने जाती थी। 20 मार्च को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। नकिता के आट्र्स में 93.80 प्रतिशत मार्क्स आए हैं।
वहीं जोधपुर की आयषा चौधरी के नंबर देखकर पिता भावुक हो गए और बेटी को गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने कहा- बेटी हमारा गर्व हैं। पढ़िए- संघर्ष के बीच बच्चों की सफलता की कहानी
12वीं आट्र्स में 93.80% आए, मां बच्ची की फोटो सीने से लगाकर रो पड़ी

गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल 7 केएनडी (श्रीगंगानगर) की छात्रा नकिता ने 12वीं आट्र्स में 93.80 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। परिवार के लोगों ने बच्ची का रिजल्ट ऑनलाइन चेक किया तो घर में पसरे सन्नाटे के बीच आंखू छलक पड़े।
मां अपनी बेटी की तस्वीर को सीने से लगाकर रो पड़ीं। मां चरणजीत कौर ने कहा- बेटी पढ़ाई में होशियार थी और उसका सपना प्रशासनिक सेवा में जाने का था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उसके जाने के बाद सब कुछ बिखर गया।

बेटी नकिता की तस्वीर के साथ मां चरणजीत कौर।
तेज बुखार में भी इंसुलिन इंजेक्शन लेकर एग्जाम देने गई थी
नकिता के नाना केसर सिंह ने बताया- नकिता को 8वीं क्लास में शुगर हो गया था। वह इंसुलिन के इंजेक्शन लेती थी। पढ़ाई में भी काफी होशियार थी। 10वीं में नकिता ने टॉप किया था। 90.50 प्रतिशत अंक थे।
12वीं के एग्जाम में वह बीमार हो गई थी। तेज बुखार में भी इंजेक्शन लेकर परीक्षा देने गई थी। नकिता कहती थी कि 12वीं में टॉप करना है।
नकिता की मां चरणजीत कौर और पिता मंगल सिंह मजदूरी करते हैं। करीब 20 दिन पहले 10 मार्च को नकिता को काफी तेज बुखार हुआ। इसके बाद दोनों बच्ची को लेकर मेरे पास ( पीलीबंगा, हनुमानगढ़) आए। डॉक्टरों ने उसे पीलिया बताया।
डॉक्टरों के कहने पर मैं (नाना) और नकिता को हनुमानगढ़ के सरकारी अस्पताल लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बीकानेर रेफर कर दिया। 2 दिन तक वह बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रही। इसके बाद तबीयत बिगड़ी और 20 मार्च को उसकी मौत हो गई।
परिवार में सबसे होशियार, कलेक्टर बनना चाहती थी
नकिता पढ़ाई में होशियार थी और प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थी। परिवार के अनुसार- वह मां से कहा कहती थी कि उसे कलेक्टर बनकर सेवा करनी है।
नकिता की बड़ी बहन पिंद्र कौर बीएसटीसी की तैयारी कर रही है। छोटी बहन निशु 10वीं में थी और इस बार 68 प्रतिशत हासिल किए थे। सबसे छोटा भाई अरमान है, जो आठवीं क्लास में पढ़ता है।

नाना केसर राम और पिता मंगल सिंह ने बताया कि नकिता को 4 साल की उम्र से शुगर थी, फिर भी वो पूरी महनत से पढ़ाई करती थी।
सरपंच बोले- नकीता के नाम से बनवाएंगे लाइब्रेरी
नकिता के घर पहुंचे सरपंच अंकुश ने बताया- गांव में एक लाइब्रेरी का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस बार आयोजित होने वाली बैठक में इस लाइब्रेरी का नाम नकिता लाइब्रेरी रखने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
ग्राम पंचायत का प्रयास है कि बच्ची के नाम पर ही लाइब्रेरी का नाम रखा जाए। नकिता की सफलता पर पूरे गांव को गर्व है, लेकिन उसके बिना हमारी खुशियां अधूरी सी लग रही हैं।
पिता बोले- मैं और मेरी पत्नी दोनों अनपढ़, बिटिया को कलेक्टर बनाएंगे
जोधपुर के बासनी तंबोलिया माता का थान की रहने वाली आयशा चौधरी ने आट्र्स में 93.20 प्रतिशत अंक हासिल किए। बेटी की सफलता को देख पिता प्रेमाराम चौधरी भावुक हो गए।

