बदायूं : बदायूं में भाजपा नेता को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया है। आरोप है कि भाजपा नेता सैलून में बाल कटवा रहे थे, तभी सपाई वहां पहुंचे। उन्होंने पहले गाली-गलौज की, फिर कॉलर पकड़कर खींचते हुए सैलून से बाहर ले आए और दौड़ा-दौड़ाकर पीटने लगे।
सपाइयों से खुद को छुड़ाने में भाजपा नेता गिर पड़े। फिर सपाइयों ने उनका पैर पकड़कर 20 मीटर घसीटा। सिर को सड़क में भिड़ा दिया। गला दबाकर मारने का भी प्रयास किया। किसी तरह वहां मौजूद लोगों ने उनकी जान बचाई।
पूरा मामला कोतवाली क्षेत्र के गांव सिद्धपुर कैथोली का है। यहां के निवासी चेतेनंद्र भाजपा के बूथ अध्यक्ष हैं। घटना 21 जून की है, लेकिन वीडियो शनिवार देर शाम सामने आया।
भाजपा नेता का कहना है- 21 जून को गांव में भाजपा की एक बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें उन्होंने भाजपा की रीति-नीति के बारे में लोगों को अवगत कराया था। इससे सपाई चिढ़ गए थे। इसके बाद उन्होंने मुझे पीटा। पुलिस ने दबंग सपाइयों के खिलाफ सिर्फ शांतिभंग में कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
तस्वीरें देखिए-

आरोपियों ने भाजपा नेता को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। फिर जमकर लात-घूसे बरसाए।

सपाइयों ने 10 सेकेंड में भाजपा नेता को 10 घूसे मारे।

भाजपा नेता का पैर पकड़कर सपाइयों ने सड़क पर 20 मीटर तक घसीटा।
भाजपा नेता ने सुनाई आपबीती
भाजपा नेता ने कहा- मैं पिछले 11 सालों से बीजेपी से जुड़ा हूं। 21 जून को योग दिवस के दिन गांव में मीटिंग की थी। सपा से जुड़े लोगों को हमारी मीटिंग नागवार गुजरी। इसके बाद जब मैं सैलून के अंदर बाल कटवा रहा था, तभी मेरे गांव के दबंग भूरे, ब्रजपाल और सुनील आ गए। तीनों सपा के गुंडे हैं।
उन्होंने मुझे गालियां दीं। जब मैंने विरोध किया तो आरोपी हमलावर हो गए। मेरा कॉलर पकड़ लिया और खींचते हुए दुकान से बाहर ले आए। फिर मुझे पीटने लगे। मैंने खुद को छुड़ाने के लिए आरोपियों के हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं, लेकिन वे पीटते रहे।

भाजपा नेता बोले- मैं भागने की कोशिश में गिर गया, तो एक ने मेरा पैर पकड़कर घसीट दिया।
मैं भागने की कोशिश में गिर गया, तो एक आरोपी ने मेरा पैर पकड़कर घसीट दिया। कुछ लोगों ने मुझे बचाने की कोशिश की तो आरोपियों ने उन्हें भी धमकाया। थोड़ी देर बाद काफी लोग जुट गए। उन्होंने किसी तरह मेरी जान बचाई। आरोपियों ने मेरा मोबाइल और पर्स भी छीन लिया।
इसके बाद मैं थाने गया और आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी। मेरे मंडल अध्यक्ष ने मदद की, तब जाकर एफआईआर दर्ज हो सकी। लेकिन पुलिस ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की। सिर्फ शांतिभंग में उनका चालान कर मामला रफा-दफा कर दिया।

