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‘जो भूल गए, उन्हें बताना है कि वे हिंदू हैं’:गोरखपुर में संघ प्रमुख ने कहा- धर्म हमारे आचरण का हिस्सा; हमें लक्ष्य पूरा करना है

गोरखपुर : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा- संघ हिंदू समाज की ही बात इसलिए करता है कि इस देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है। हिंदू समाज मानता है कि हमारा रास्ता भी ठीक है और तुम्हारा भी। इस समाज में रुचि के अनुसार अन्य पंथ संप्रदाय हैं।

उन्होंने कहा- रास्ते अलग हो सकते हैं लेकिन लक्ष्य एक है। इस धारणा को मानने वाला हिंदू समाज है। हिंदू नाम भारत के साथ रूढ़ हो गया है इसलिए इसी नाम से सनातन जगेगा। जो भूल गए हैं, उन्हें याद दिलाना है कि वे हिंदू हैं। जिससे हिंदू समाज खड़ा हो सके। हमें अपना लक्ष्य पूरा करना है।

गोरक्ष प्रांत प्रवास के दूसरे दिन रविवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह मे संघ प्रमुख ने प्रबुद्धजन संगोष्ठी को संबोधित किया।

योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में RSS के 100 साल पूरे होने पर प्रमुख जन बैठक में बोलते संघ प्रमुख।

योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में RSS के 100 साल पूरे होने पर प्रमुख जन बैठक में बोलते संघ प्रमुख।

हिंदू शब्द एक संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण है, जो गुणधर्म बताता है

संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू शब्द एक संज्ञा नहीं बल्कि व्याकरण की दृष्टि से एक विशेषण है, जो गुणधर्म बताता है। यह सबको एक साथ चलाता है। समाज सहिष्णुता और समन्वयता से ही चलना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए नहीं, दूसरों के हित के लिए चलना ही भारतीय संस्कृति है। इस सत्य को पहचानने में ही हमें शाश्वत आनंद की प्राप्ति हुई।

हमारा राष्ट्र धर्मप्राण राष्ट्र

संघ प्रमुख ने कहा- हमारा राष्ट्र धर्मप्राण राष्ट्र है। धर्म हमारे आचरण का हिस्सा है। इसके लिए संस्कार की जरूरत थी। पीढ़ी दर पीढ़ी मानवी आदतें बनाई गई, यही संस्कार है। इससे ही संस्कृति बनी। इसी संस्कृति के आधार पर राष्ट्र का निर्माण हुआ। हम एक हैं, इस सत्य को हमने जाना।

संघ की दृष्टी पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में संघ से अपेक्षाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा- विश्व के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जो समाज को सुख और शांति दे सके। इसलिए वह भी हमारी तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है।

भारतवर्ष में पाश्चात्य चिंतन का प्रभाव पड़‌ने लगा था, जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को खंडित करने का प्रयत्न किया और अपने चिंतन को स्थापित करने का प्रयास किया। लेकिन उनकी चिंतन पद्धति अधूरी थी। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित हमारी चिंतन पद्धति ही समाज में उत्पन्न शंकाओं का समाधान कर सकती है।

योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में RSS के 100 साल पूरे होने पर सामाजिक सद्भाव बैठक में मौजूद RSS के पदाधिकारी।

योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम में RSS के 100 साल पूरे होने पर सामाजिक सद्भाव बैठक में मौजूद RSS के पदाधिकारी।

सद्भाव बैठक के बाद सवर्ण, ओबीसी और दलित समाज के प्रतिनिधियों के साथ भोजन किया

सद्भाव बैठक के बाद संघ प्रमुख ने सवर्ण, ओबीसी और दलित समाज के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर भोजन किया। उन्होंने कहा- समाज उसे कहते हैं, जिसमें आपस में जुड़ाव हो। अर्थ और स्वार्थ से जुड़ा अपनापन टिकता नहीं है।

उन्होंने कहा- हम जाति की चिंता कर रहे, जबकि हमें बड़े हिंदू समाज के लिए काम करना चाहिए। समाज में यदि सद्भावना नहीं है तो कानून और पुलिस के बावजूद समाज नहीं चलता।

विदेश में मनुष्य से मनुष्य का सम्बंध सौदा, यहां अपनेपन का है

संघ प्रमुख ने कहा- विदेश में मनुष्य से मनुष्य का सम्बंध एक सौदा है लेकिन भारत मे मनुष्यों के सम्बंध का विचार ऐसा नहीं है। यहां संबंध अपनेपन का है। हमारे देश मे अनेक विविधताएं हैं। अनेक रीति रिवाज हैं। यहां विविधता में एकता है। भारत को हम माता मानते हैं।

उन्होंने कहा- हमारी संस्कृति में हम महिला को वात्सल्य की दृष्टि से देखते हैं। सदियों के आचरण से हमारा यह स्वभाव बना है। हमारे यहां अलग रंग-रूप और वेशभूषा अलगाव का कारण नहीं बनते। हमारे समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान है। यही हमारा समान लक्ष्य और समान संस्कृति है। समाज सद्भाव से चलता है।

ब्लाक स्तर पर दो से तीन बार बैठक करें

सरसंघचालक ने कहा कि संघ के 100 साल पूरे हुए हैं। यह कोई उत्सव की बात नहीं है। जिसे करने में 100 वर्ष लग गए, वह और पहले हो जाना चाहिए था। हमें करना यह है कि ब्लॉक स्तर पर साल में 2-3 बार बैठें।

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