संभल : यूपी के संभल में 48 घंटे में दूसरी बार नए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की तैनाती की गई है। अब कौशांबी के CJM दीपक कुमार जायसवाल को संभल का नया CJM बनाया गया है। वहीं, संभल CJM आदित्य सिंह को वापस सिविल जज (सीनियर डिवीजन), चंदौसी भेज दिया गया है। इसके अलावा, नावेद अख्तर को जूनियर डिवीजन जज, संभल से अपर सीनियर डिवीजन सिविल जज, चंदौसी नियुक्त किया गया है।
आदित्य सिंह को दो दिन पहले ही प्रमोशन दिया गया था। उन्हें विभांशु सुधीर की जगह CJM संभल बनाया गया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ वकीलों में काफी नाराजगी थी। आदित्य सिंह ने ही संभल के श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद दावे पर सर्वे के आदेश दिए थे। विभांशु को सुल्तानपुर में सिविल जज सीनियर डिवीजन के पद पर भेजा गया था।
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार की शाम बड़ा फेरबदल करते हुए 14 जजों के तबादले कर दिए थे। लिस्ट में चौंकाने वाला नाम विभांशु सुधीर का था। विभांशु ने 9 जनवरी को ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। आरोप है कि संभल हिंसा के दौरान ASP अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने एक युवक को गोली मार दी थी।
जज के ट्रांसफर से भड़के वकील, प्रदर्शन कर कहा था- न्याय की हत्या
- विभांशु सुधीर के तबादले के बाद वकील भड़क गए थे। बुधवार को वकीलों ने चंदौसी कोतवाली के पास सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। वकीलों ने यूपी सरकार और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। जज के ट्रांसफर को न्याय की हत्या बताया था। कहा था कि अच्छे जज को डिमोट जा रहा है। वकीलों का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश के बाद उनका तबादला किया गया।
- अधिवक्ता रोशन सिंह यादव ने कहा था- भगवान भी अच्छे लोगों को सजा नहीं देता। ये गलत ट्रांसफर है। एक अच्छे जज को सजा देने का अधिकार किसी को नहीं। हमारी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मांग है कि उनका ट्रांसफर रद्द किया जाए। सरकार और प्रशासन के दबाव में जज का ट्रांसफर किया गया है। ये असहनीय है।
- बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेश यादव ने कहा था- जज विभांशु जिले में न्याय व्यवस्था के लिए बेहतरीन काम कर रहे थे। उनके कार्यकाल में 8-8 दिन में फैसले हुए हैं। पुलिस और ASP अनुज चौधरी के खिलाफ आदेश देने पर उनका ट्रांसफर किया गया। उनका ट्रांसफर रद्द होना चाहिए। उन्हें संभल जिले में वापस बुलाना चाहिए।

कहां-कहां तैनात रहे विभांशु?
- साल 2013 में सुल्तानपुर जिले में ये पहली बार एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनाए गए।
- साल 2015 में सिविल जज मुसाफिरखाना-सुल्तानपुर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन बनाए गए।
- उसके बाद एटा में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बने, फिर मुरादाबाद, चंदौली, गाजियाबाद में भी सेवाएं दीं।
- सितंबर 2025 में ये संभल के चंदौसी में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनाए गए।

FIR आदेश के 6 दिन बाद 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर ASP अनुज चौधरी गोरखपुर पहुंचे थे। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की थी।
पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश क्यों हुए थे?
संभल में नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन में रहने वाले यामीन ने CJM कोर्ट में 6 फरवरी, 2025 को याचिका दायर की थी। यामीन ने बताया था कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी थी।
यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था। 9 जनवरी, 2026 को कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे।
यामीन के वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस से छिपकर अपना इलाज कराया। कोर्ट से पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR की मांग की गई थी।

