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Wed. Feb 11th, 2026

पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन:मिर्जापुर में बेटी के घर अंतिम सांस ली, काशी में होगा अंतिम संस्कार; मोदी के प्रस्तावक रहे

वाराणसी/मिर्जापुर : शास्त्रीय गायक, पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के निधन हो गया। वे 89 साल के थे। उन्होंने सुबह 4.15 बजे बेटी नम्रता मिश्रा के मिर्जापुर स्थित घर पर अंतिम सांस ली। छन्नूलाल मिश्र का ‘खेले मसाने में होली…’ गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है।

पंडित छन्नूलाल मिश्र की चार बेटियां और एक बेटा है। पत्नी और एक बेटी का 4 साल पहले निधन हो चुका है। नम्रता ने बताया- अंतिम संस्कार आज शाम काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। छन्नूलाल मिश्र 2014 लोकसभा चुनाव में PM मोदी के प्रस्तावक रहे थे। मोदी और CM योगी ने उनके निधन पर दुख जताया है।

पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत 7 महीने से खराब थी। हाल ही में वो 17 दिन हॉस्पिटल में एडमिट रहे। 11 सितंबर को मिर्जापुर में बेटी के घर तबीयत बिगड़ी। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

13 सितंबर की रात BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया। तबीयत में सुधार होने पर उन्हें 27 सितंबर को डिस्चार्ज किया गया। फिर वह बेटी के घर मिर्जापुर चले गए थे।

पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन की खबर बेटी नम्रता मिश्रा ने दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग घर पहुंच गए।

पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन की खबर बेटी नम्रता मिश्रा ने दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग घर पहुंच गए।

तस्वीर 11 सितंबर की है, पंडित छन्नूलाल मिश्र को बेटी नम्रता ने मिर्जापुर में हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

तस्वीर 11 सितंबर की है, पंडित छन्नूलाल मिश्र को बेटी नम्रता ने मिर्जापुर में हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

पत्नी मनोरमा मिश्रा के साथ पंडित छन्नूलाल मिश्र की तस्वीर।

पत्नी मनोरमा मिश्रा के साथ पंडित छन्नूलाल मिश्र की तस्वीर।

BHU की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया था- पंडित छन्नूलाल को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) है। फेफड़ों में गंभीर सूजन है। उन्हें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और प्रोस्टेट बढ़ा है।

आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ था। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। छन्नूलाल ने छह साल की उम्र से ही अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ ने खयाल सिखाया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया।

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