वाराणसी : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को वाराणसी में कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा। उन्होंने कहा
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सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। इन्होंने स्वामी वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य का प्रमाणपत्र दिया। उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने रोक रखा है। कोर्ट बार-बार कह रही है कि इन्हें शंकराचार्य न कहा जाए।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सपा ने शंकराचार्य को मारा था। आप भी मार चुके हो। मतलब सपा ने जिसे मारा, उसे हम भी मार सकते हैं। अगर यही परिभाषा है, तो आप सपा से अलग कैसे हो सकते हो? जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार आप पर चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका हाल देखिएगा।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- परंपरा के तहत ही मुझे ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। सनातन धर्म में कोई भी संन्यासी शंकराचार्य के पद से ऊपर नहीं है।
दरअसल, शुक्रवार को सदन में CM ने अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर पहली बार अपनी बात रखी थी। इस दौरान योगी ने कहा था- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

