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उपराष्ट्रपति बोले- गंगा स्नान करके मैंने मांस खाना छोड़ दिया:धर्म को कुछ समय के लिए ही संकट; काशी में बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया

वाराणसी : देश के उपराष्ट्रपति बनने के बाद सीपी राधाकृष्णन पहली बार वाराणसी पहुंचे। 4 घंटे के अपने दौरे में उन्होंने नाटकोटक्षेत्रम की नट्टुकोट्टई धर्मशाला का तोहफा काशी के लोगों को दिया। ये धर्मशाला सिगरा में बनकर तैयार हुई है।

इस दौरान उन्होंने कहा- मैं 25 साल पहले काशी आया था, वो शायद साल 2000 था, तब मैं मांस खाता था, यहां गंगा मइया में स्नान करने करने के बाद मन के भाव ऐसे बदले कि मैं शाकाहारी बन गया, फिर कभी मांस को हाथ नहीं लगाया।

उन्होंने आगे कहा- धर्म को कुछ समय के लिए ही संकट हो सकता है। इसकी ये इमारत साक्षी है। इसके लिए आपको कितने संकटों का सामना करना पड़ा? फिर भी आज धर्म की जीत हुई है।

इस दौरान CM योगी भी वहां मौजूद रहे। सिगरा से वह श्री विश्वनाथ धाम पहुंचे। गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ का अभिषेक और षोडशोपचार विधि से पूजन किया। 4 घंटे काशी में रहने के बाद दिल्ली लौट गए।

सीएम योगी और उपराष्ट्रपति ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सीएम योगी और उपराष्ट्रपति ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

काशी विश्वनाथ में सीएम योगी और उपराष्ट्रपति ने पूजा की।

काशी विश्वनाथ में सीएम योगी और उपराष्ट्रपति ने पूजा की।

उपराष्ट्रपति ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर पूजन किया

उपराष्ट्रपति ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए और शांति, समृद्धि और सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में स्थित अन्नपूर्णी अम्मन देवी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। कहा कि परिसर में देवी अन्नपूर्णी अम्मन देवी की मूर्ति की वापसी ऐतिहासिक है। एक सदी से भी पहले वाराणसी के मंदिर से चुराई गई यह मूर्ति 2021 में कनाडा से भारत वापस आ गई।

उपराष्ट्रपति बोले- काशी में अब भक्ति के साथ-साथ विकास भी

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा- काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक बंधन हैं। इस इमारत का उद्घाटन कर मैं अति प्रसन्न हूं। काशी में अब भक्ति के साथ-साथ विकास भी है। 140 कमरों वाला यह 10 मंजिला सत्रम, वाराणसी में समिति द्वारा निर्मित दूसरा सत्रम है।

इसका उद्देश्य आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना और युवा पीढ़ी को इस पवित्र नगरी में आने के लिए प्रोत्साहित करना है। उप राष्ट्रपति ने आयोजकों से धर्मशाला की विशेषताएं और श्रद्धालुओं की सुविधाएं जानी।

जिस भूमि पर अब सतराम स्थित है, उस पर कभी अतिक्रमण किया गया था, लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों से उसे सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह सतराम अब श्रद्धालुओं के लिए एक उत्कृष्ट सुविधा बन गया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है और नवनिर्मित सतराम से आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। ध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी।

योगी बोले- काशी और तमिलनाडु के सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये हमारे लिए सुखद संयोग है कि यूपी की इस यात्रा में उपराष्ट्रपति जी बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आए हैं। श्रीकाशी नाटकोट्टई नगर क्षेत्रम मैनेजिंग सोसाइटी द्वारा निर्मित धर्मशाला का उद्घाटन उपराष्ट्रपति ने किया। यहां श्रद्धालुओं को रहने की सुविधा मिलेगी। काशी और तमिलनाडु के प्राचीन सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।

भगवान श्रीराम द्वारा रामेश्वरम धाम में स्थापित पावन ज्योतिर्लिंग और काशी में विराजमान भगवान आदि विश्वेवश्वर ज्योतिर्लिंग, यह एक-दूसरे के रूप में पूजित हैं। काशी विश्वनाथ और रामेश्वरम दोनों भगवान शिव के दिव्य स्वरूप हैं।

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