- जीएलए की सामाजिक पहल प्रयास के बैनर तले इंटर-स्कूली छात्रों के लिए एक विशेष प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन
दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय की सामाजिक पहल प्रयास के बैनर तले इंटर-स्कूली छात्रों के लिए एक विशेष प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आत्म-विश्वास, सकारात्मक सोच और करियर के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करना था।
मथुरा के कई विद्यालयों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीरज अग्रवाल रहे, जिन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, संघर्षों और प्रेरणादायक किस्सों से छात्रों को ऊर्जा और नई दिशा दी। उन्होंने छात्रों को समझाया कि जीवन केवल दिन काटने का नाम नहीं है, बल्कि हर दिन को सार्थक और लक्ष्यपूर्ण बनाना ही असली जीवन जीना है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि 99 प्रतिशत लोग जीवन में केवल भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं। वे आते हैं, जीते हैं और बिना किसी पहचान के चले जाते हैं। लेकिन यदि आप डर से बाहर निकलकर सपनों को पूरा करने का साहस करते हैं, तभी आपकी पहचान बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि डर पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को खुद से संवाद करना होगा। अपने भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें निखारना ही सफलता की असली कुंजी है। अपने वक्तव्य में उन्होंने बच्चों और माता-पिता के रिश्ते पर भी जोर दिया और कहा कि आज अधिकांश बच्चे अपने अभिभावकों से खुलकर बात नहीं कर पाते, नतीजतन वे अपने सपनों को दबा देते हैं और ऐसे करियर में चले जाते हैं जिसमें उनका मन ही नहीं लगता। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपके जीवन का सबसे बड़ा साथी आपके माता-पिता हैं। उनसे संवाद करें, अपने सपनों और इच्छाओं को साझा करें, तभी आप सही फैसले ले पाएंगे।
अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने यह विचार भी साझा किया कि लोग अक्सर सिर्फ सांस लेते रहते हैं और उसे जीवन समझ लेते हैं, जबकि असली जीवन वह है जिसमें उद्देश्य, खुशियां और आत्मसंतोष हो। उन्होंने कहा कि साधारण जीवन और सार्थक जीवन में अंतर समझिए और ऐसा जीवन जीना चाहिए जिसमें न केवल खुद के लिए, बल्कि समाज के लिए भी कुछ योगदान हो।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में छात्रों ने अनेक प्रश्न पूछे, जिनमें कोई चित्रकार बनना चाहता था, कोई रसोइया, कोई प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, तो कोई खेलकूद में आगे बढ़ना चाहता था। सीईओ ने हर प्रश्न का उत्तर सरल उदाहरणों और अपने अनुभवों से दिया। उन्होंने कहा कि समाज की रूढ़ियां आपको रोक सकती हैं, लेकिन आपकी लगन और दृढ़ता ही आपको आगे ले जाएगी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आत्म-प्रेम की महत्ता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि हम अक्सर सबको प्यार करते हैं, लेकिन खुद को प्यार करना भूल जाते हैं। जब तक आप खुद से प्रेम नहीं करेंगे, तब तक किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे।
अंत में छात्रों ने इस सत्र को बेहद प्रभावी और यादगार बताया। एक छात्रा ने कहा कि आज मुझे यह समझ आया कि डर से बाहर निकलना और खुद पर विश्वास करना ही सफलता की कुंजी है। वहीं एक अन्य छात्र ने कहा कि मुझे अपने माता-पिता से खुलकर बात करने का साहस इस कार्यक्रम से मिला।
इस प्रेरक कार्यक्रम में बीबीआर इंटरनेशनल स्कूल, आरएसडी स्कूल, बाबा पातीराम स्कूल, रियल पब्लिक स्कूल और रियल इंटरनेशनल स्कूल के 350 से अधिक विद्यार्थी प्रमुख रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन नितिन गौर द्वारा किया गया तथा इसके प्रबंधन में मुकुल राजपूत, प्रभांशु, कृष्णा वर्मा, प्रिया, दीक्षा, शालिनी अरोरा, कोमल, नीलम और जीएलए विश्वविद्यालय के अन्य छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

