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जीएलए में श्रीकृष्ण-द्रौपदी अंतर्कथा सजीव हुआ धर्म और इतिहास

  • जीएलए में द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट के कलाकारों ने कथक के माध्यम से दर्शाया श्रीकृष्ण-द्रौपदी इतिहास

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण-महारानी द्रौपदी संवाद’ एवं महारानी द्रौपदी अंतर्कथा’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर कथक नृत्य के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण और महारानी द्रौपदी के जीवन, उनके संघर्ष, आत्मसम्मान और धर्म के सिद्धांतों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अथिति अखिल भारतीय संपर्क विभाग के प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रामलाल जी, विशिष्ट अथिति सांसद हेमामालिनी, द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट की अध्यक्ष नीरा मिश्रा तथा जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, चीफ फाइनेंस ऑफिसर डा. विवेक अग्रवाल, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

अपने संबोधन में नीरा मिश्रा ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पांचाल क्षेत्र में महारानी द्रौपदी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना तथा उनके वास्तविक स्वरूप और योगदान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी केवल एक ऐतिहासिक पात्र नहीं, बल्कि नारी शक्ति, सम्मान और साहस की प्रतीक हैं।

नीरा मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा आज के युवाओं के लिए अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों को समझना अत्यंत आवश्यक है। द्रौपदी का जीवन हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, आत्मबल और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। यदि युवा इन आदर्शों को अपनाएं, तो वे अपने जीवन में सफलता के साथ-साथ समाज के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं।

द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट ने अपनी स्थापना के 22 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस विशेष नृत्य-नाटिका का मंचन किया। कवि अकबर महफूज आलम रिजवी द्वारा रचित इस प्रस्तुति में गीता के उपदेशों की पृष्ठभूमि बनने वाली घटनाओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ शब्दों में पिरोया गया, जिसे कलाकारों ने अपने नृत्य और भाव-भंगिमाओं से जीवंत कर दिया।

कर्तव्य और गीता के सार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया

इस प्रस्तुति के लिए कथक नृत्य शैली का चयन विशेष रूप से किया गया, क्योंकि यह विधा प्राचीन काल से ही भागवत और पौराणिक कथाओं के प्रसार का प्रमुख माध्यम रही है। नृत्य-नाटिका के माध्यम से धर्मयुद्ध, कर्तव्य और गीता के सार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति में गुरु सदानंद बिस्वास ने श्रीकृष्ण तथा सुचिता मजुमदार ने महारानी द्रौपदी की भूमिका निभाते हुए अपने सशक्त अभिनय और नृत्य से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व-रिकॉर्ड की गई इस प्रस्तुति में ‘हम लोग’ धारावाहिक के प्रसिद्ध कलाकार अभिनव चतुर्वेदी ने श्रीकृष्ण के संवादों को स्वर दिया, जबकि रंगमंच निर्देशिका मधुमिता मानवी ने द्रौपदी के संवादों को प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्रदान की।

कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि समग्र शिक्षा में ज्ञान के साथ-साथ संस्कृति और कला का समावेश आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी, वसुधा, रंजीत चतुर्वेदी, श्रीचन्द्र वाधवा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहयोग जीएलए डीन स्टूडेंट वेलफेयर विभाग की सीनियर मैनेजर निहारिका सिंह का रहा।

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