- राष्ट्रीय स्तर की शोध प्रयोगशालाओं में प्राप्त किया व्यावहारिक अनुभव, नवाचार की दिशा में बढ़ा आत्मविश्वास
मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के जैव प्रौद्योगिकी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं अनुसंधान कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया गया। इस क्रम में विभाग के एमओयू तहत पतंजलि रिसर्च फ़ाउंडेशन, हरिद्वार तथा भारत सरकार के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान आईसीएआर–इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सॉयल एंड वॉटर कंज़र्वेशन, मुख्यालय देहरादून का भ्रमण कराया गया।
इस शैक्षणिक भ्रमण में एमएससी बायोटेक्नोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी अंतिम वर्ष तथा बीटेक बायोटेक्नोलॉजी तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने उत्साह, जिज्ञासा और पूर्ण अनुशासन के साथ सहभागिता की। इस भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की सैद्धांतिक शिक्षा से आगे बढ़कर वास्तविक शोध वातावरण, आधुनिक तकनीकों और प्रयोगात्मक कार्यप्रणालियों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना रहा।
इस अध्ययन यात्रा का नेतृत्व डॉ. सौरभ गुप्ता एवं डॉ. सुखेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। साथ ही विभाग के पीएचडी शोधार्थी समीक्षा अग्रवाल एवं शिवांगी शर्मा के सक्रिय सहयोग, मार्गदर्शन एवं समन्वय से यह शैक्षणिक दौरा अत्यंत सफल, सुव्यवस्थित और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। संकाय सदस्यों द्वारा छात्रों को प्रत्येक शोध गतिविधि की वैज्ञानिक उपयोगिता और व्यावहारिक महत्व को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया गया।
पतंजलि रिसर्च फ़ाउंडेशन में विद्यार्थियों को औषधीय पौधों पर आधारित अनुसंधान, हर्बल उत्पाद विकास, गुणवत्ता परीक्षण, जैव प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों तथा अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। वहीं, आईसीएआर–इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सॉयल एंड वॉटर कंज़र्वेशन में विद्यार्थियों को मृदा एवं जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कृषि अनुसंधान से जुड़ी उन्नत तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
भ्रमण के दौरान छात्रों को उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं, अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों और नवीनतम तकनीकी अनुप्रयोगों को निकट से देखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ शोधकर्ताओं के साथ हुए संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों को अनुसंधान की वास्तविक चुनौतियों, संभावनाओं और भविष्य की दिशा से अवगत कराया, जिससे उनके भीतर शोध एवं नवाचार के प्रति नई प्रेरणा का संचार हुआ।
इस अवसर पर जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शूर वीर सिंह ने संकाय सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण विद्यार्थियों को आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी तकनीकों की गहन समझ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में शोध के प्रति गंभीरता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने इस सफल शैक्षणिक पहल के लिए जैव प्रौद्योगिकी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग को बधाई दी तथा कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, शोध एवं नवाचार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य, अनुसंधान कार्यों में उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
यह शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ, बल्कि उनके अकादमिक कौशल, अनुसंधान दृष्टिकोण और व्यावहारिक समझ को भी नई दिशा प्रदान करने वाला रहा। निश्चित रूप से यह अनुभव उनके करियर और भविष्य निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा तथा उन्हें शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

