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Fri. Feb 13th, 2026

जीएलए गणित विभाग के प्रोफेसरों के अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए शोधपत्र

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के गणित विभाग ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। विभाग के दो वरिष्ठ शिक्षकों डा. विनोद कुमार भारद्वाज और डा. उमाशंकर सामल ने अपने-अपने अनुसंधान क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में अपने शोध प्रकाशित कर विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया है।

डा. विनोद कुमार भारद्वाज का शोधपत्र ‘फिजिक्स ऑफ डार्क यूनिवर्स’ जैसे उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जो संशोधित गुरुत्वाकर्षण पर आधारित है। यह शोध ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों जैसे डार्क मैटर, डार्क एनर्जी और ब्रह्मांडीय त्वरण को समझने के लिए आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत का वैज्ञानिक विस्तार प्रस्तुत करता है। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि “यह कार्य प्रकृति की मूलभूत शक्तियों को समझने में रोमांचक संभावनाओं के द्वार खोलता है।” यह शोध न केवल ब्रह्मांड विज्ञान और खगोल भौतिकी को प्रभावित करने वाला है, बल्कि उच्च-ऊर्जा भौतिकी के क्षेत्र में भी नई सोच को जन्म दे रहा है।

वहीं, गणित विभाग के ही शिक्षक डा. उमाशंकर सामल ने जनवरी 2025 से अब तक चार समकक्ष-समीक्षित शोधपत्र प्रकाशित किए हैं। उनका एक प्रमुख शोध कण झुंड अनुकूलन और फज़ी टाइम सीरीज़ के माध्यम से सॉफ्टवेयर दोष पूर्वानुमान के लिए एक हाइब्रिड मॉडल प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक सटीक और विश्वसनीय है। यह शोध वास्तविक जीवन के कई डेटा सेट पर भी सफलतापूर्वक परीक्षणित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, डा. सामल का एक और शोधपत्र, जो ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कम्युनिकेशन सिस्टम्स (एससीआइई)’ में प्रकाशित हुआ है, अगली पीढ़ी के वायरलेस नेटवर्क में एकीकृत संवेदन और संचार (आईएसएसी) की भूमिका और भविष्य की दिशा पर केंद्रित है। यह अध्ययन इस क्षेत्र के वैश्विक परिदृश्य का विश्लेषण करता है तथा भावी संचार प्रणालियों के लिए एक संरचित रूपरेखा प्रदान करता है।
डा. सामल का यह शोध न केवल अकादमिक जगत में योगदान दे रहा है, बल्कि आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को भी व्यावहारिक स्तर पर सशक्त बना रहा है।

गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष गोयल ने दोनों शोधकर्ताओं को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि “हमारे विभाग के शिक्षक न केवल शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, बल्कि विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान भी दिला रहे हैं। ये उपलब्धियां हमारे विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरणा हैं।”

जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान को भी उच्च प्राथमिकता दिए जाने का परिणाम है कि आज उसके शोधकर्ता वैश्विक शोध पत्रिकाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता, अनुसंधान-परक माहौल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मशीन लर्निंग विषय पर हुआ शिक्षक विकास कार्यक्रम

जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के गणित विभाग द्वारा संत लोंगोवाल अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एसएलआइईटी), पंजाब के गणित विभाग के सहयोग से “गणित और अभियंत्रण समस्याओं के लिए मशीन लर्निंग (एमएमएलईपी-2025)” विषय पर पांच दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें विभिन्न संस्थानों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल रहे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गणितीय विधियों और आधुनिक मशीन अधिगम (मशीन लर्निंग) तकनीकों के बीच की दूरी को कम करना था, जिससे तकनीकी और वास्तविक जीवन की समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हल किया जा सके।

कार्यक्रम में जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, एसएलआइईटी पंजाब के निदेशक प्रो. मणि कांत पासवान, शैक्षणिक संकायाध्यक्ष प्रो. एएस शाही तथा जीएलए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यों के अधिष्ठाता प्रो. आशीष शर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर एसएलआइईटी से कार्यक्रम संयोजक प्रो. वीके कुक्रेजा और जीएलए विश्वविद्यालय से संयोजक डा. अमित कुमार सरस्वत ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। जीएलए विश्वविद्यालय के गणित विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष गोयल ने अपने विचार रखे और कार्यक्रम की उपयोगिता को रेखांकित किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की विषयवस्तु, तकनीकी गुणवत्ता और प्रशिक्षण शैली की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

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