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जीएलए गणित के शिक्षकों के शोध पत्रों ने पाया अंतरराष्ट्रीय मंच

  • जीएलए विश्वविद्यालय के गणित विभाग के दो शिक्षकों के शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वह शोध और नवाचार की दिशा में लगातार उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। विश्वविद्यालय के गणित विभाग के दो शिक्षकों के शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इन शोध कार्यों ने न केवल विभाग का, बल्कि संपूर्ण विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है और जीएलए विश्वविद्यालय को शोध और नवाचार के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाया है।

गणित विभाग के शिक्षक डा. विनीत कुमार चौरसिया का शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फिजिक्स ऑफ फ्लुइड्स में प्रकाशित हुआ है। इस शोध पत्र का शीर्षक “मशीन अधिगम का उपयोग करते हुए सोरेट और डुफोर प्रभावों के साथ खिंचाव सतह पर चुंबकीय द्रव गतिकी (एमएचडी) विलियमसन द्रव प्रवाह का संगणनात्मक अध्ययन” है। इस शोध में विलियमसन द्रव मॉडल, चुंबकीय द्रव गतिकी (एमएचडी) और सोरेट एवं डुफोर प्रभावों का घातांकीय रूप से खिंचने वाली सतह पर विस्तृत अध्ययन किया गया है।

इस प्रकार के द्रव का प्रयोग बहुलक प्रसंस्करण, जैव-चिकित्सा उपकरणों और खाद्य निर्माण उद्योग सहित विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों में इसकी अपरूपण-पतलापन प्रकृति के कारण बार-बार किया जाता है। परंपरागत रूप से ऐसे जटिल मॉडलों को हल करने के लिए संख्यात्मक विधियों और आंकड़ा-संचालित दृष्टिकोणों का उपयोग किया जाता रहा है। लेकिन इस शोध में मशीन अधिगम जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया, जिसने सिमुलेशन को और अधिक सटीक एवं प्रभावी बनाया। मशीन अधिगम ने विशेष रूप से विस्तृत मानदंड (पैरामीटर) क्षेत्रों में प्रवाह व्यवहार की भविष्यवाणी करने में अत्यंत आशाजनक परिणाम दिए हैं। इसका उपयोग द्रव यांत्रिकी समस्याओं के त्वरित विश्लेषण में भी किया जा सकता है, जिसमें द्रव प्रवाह, ऊष्मा एवं द्रव्यमान स्थानांतरण तथा प्रतिगमन विश्लेषण जैसी जटिल गणनाएं सम्मिलित होती हैं।

इसी क्रम में गणित विभाग के एक अन्य प्रतिभाशाली शिक्षक डा. कपिल कुमार का भी शोध पत्र प्रकाशित हुआ है, जिसका शीर्षक “अभाज्य विलयों पर गुणात्मक सामान्यीकृत जी-व्युत्पन्न से संबंधित सर्वसमिकाएँ” है। इस शोध पत्र में उन्होंने एक विलय आर पर गुणात्मक सामान्यीकृत जी-व्युत्पन्न की परिभाषा स्थापित की है। साथ ही अभाज्य वलयों में सामान्यीकृत व्युत्पन्नों, सामान्यीकृत विषम व्युत्पन्नों और सामान्यीकृत जी-व्युत्पन्नों के संबंध में कई प्रसिद्ध परिणामों को गुणात्मक सामान्यीकृत जी-व्युत्पन्नों के मामले में सामान्यीकृत किया गया है। यह शोध गणितीय व्युत्पन्न सिद्धांत में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो इस क्षेत्र में आगे आने वाले अनुसंधानों के लिए नई संभावनाएं खोलता है।

गणित विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष गोयल ने दोनों शिक्षकों की इस उपलब्धि पर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध को प्राथमिकता देता रहा है। विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, सुसज्जित पुस्तकालय, नवीनतम तकनीकी संसाधन और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय हर दिन नए शोध कार्यों और नवाचारों के साथ आगे बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा जगत में उत्कृष्टता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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