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जीएलए विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप में सफलता

  • न्यूट्रिनो और गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर शोध को मिला वैश्विक सम्मान

मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने एक बार फिर अपनी अनुसंधान क्षमता का परचम अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराया है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। न्यूट्रिनो और गुरुत्वाकर्षण तरंग अध्ययन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्यरत इन शोधकर्ताओं का चयन प्रतिष्ठित एकेडेमिया सिनिका पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप और ताइवान अंतरराष्ट्रीय स्नातक कार्यक्रम के लिए हुआ है।

न्यूट्रिनो और गुरुत्वाकर्षण तरंगों का अध्ययन आज वैज्ञानिक समुदाय में मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मांडीय घटनाओं की गहराई को समझने का एक नया आयाम प्रस्तुत करता है। ये दोनों क्षेत्र आधुनिक खगोल विज्ञान के पूरक स्तंभ बन चुके हैं, जो मिलकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति, संरचना और रहस्यमय ऊर्जा स्रोतों पर नई दृष्टि प्रदान करते हैं।

जीएलए विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि विभाग ने एकेडेमिया सिनिका, ताइवान के भौतिकी संस्थान के साथ ब्रह्मांडीय रहस्यों पर सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया है। इस पहल के अंतर्गत डॉ. सुवादीप कर्माकर ने वर्ष 2024 में अपनी पीएचडी पूरी की। उन्होंने कोहेरेंट इलास्टिक न्यूट्रिनो-न्यूक्लियस स्कैटरिंग पर असाधारण शोध कार्य किया, जो अमेरिका के विश्वविख्यात फिजिकल रिव्यू लेटर्स पीआरएल जर्नल में प्रमुख लेखक के रूप में प्रकाशित हुआ। इस उपलब्धि के आधार पर उन्हें 2025 में सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता पुरस्कार प्राप्त हुआ।

डॉ. सुवादीप कर्माकर के उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उनका चयन प्रतिष्ठित एकेडेमिया सिनिका पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप 2025 के लिए हुआ है, जिसके तहत उन्हें अपने आगे के शोध कार्य हेतु प्रति वर्ष 28.24 लाख रुपये की फेलोशिप प्रदान की जाएगी।
इसी एमओयू के अंतर्गत विवेक कुमार वर्तमान में अपनी पीएचडी कर रहे हैं। उनका चयन ताइवान अंतरराष्ट्रीय स्नातक कार्यक्रम के लिए हुआ है, जहाँ उन्हें तीन वर्षों तक प्रति वर्ष 12.93 लाख रुपये की फेलोशिप प्राप्त होगी। वे न्यूट्रिनो भौतिकी और गुरुत्वाकर्षण तरंगों पर प्रायोगिक अध्ययन कर रहे हैं, जिससे ब्रह्मांडीय भौतिकी के क्षेत्र में नए आयाम खुलेंगे।

फेलोशिप विश्वविद्यालय की अनुसंधान संस्कृति की गुणवत्ता का प्रमाण

भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. अनुज विजय ने दोनों शोधार्थियों और उनके मार्गदर्शक डॉ. मनोज कुमार सिंह को इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि “यह उपलब्धि न केवल विभाग बल्कि संपूर्ण विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है।”
प्रो. कमल शर्मा, डीन (अनुसंधान एवं विकास) ने भी इस फेलोशिप को विश्वविद्यालय की अनुसंधान संस्कृति की गुणवत्ता का प्रमाण बताया और कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय अपने शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं शैक्षणिक सहयोग कार्यालय के डीन प्रो. दिलीप कुमार शर्मा ने कहा कि ताइवान जैसे देशों के साथ हो रहे सहयोगात्मक शोध से विश्वविद्यालय की वैश्विक साख और मजबूत होगी।”

कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता और कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की दूरदर्शी शिक्षा नीति, नवाचार आधारित अनुसंधान वातावरण और उत्कृष्ट मार्गदर्शन का परिणाम है। जीएलए विश्वविद्यालय आने वाले समय में भी इसी तरह वैश्विक मंचों पर भारत का नाम रोशन करता रहेगा। जीएलए विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि न केवल ब्रज क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि भारत की युवा वैज्ञानिक पीढ़ी अब विश्व वैज्ञानिक समुदाय में अपनी मजबूत पहचान बना रही है।

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