दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संकाय के एग्री वेंचर क्लब द्वारा ‘कृषिमंथन–2026’ का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम दो खंडों में संपन्न हुआ। प्रथम चरण में विद्यार्थियों ने आधुनिक कृषि आधारित मॉडल, प्रोटोटाइप, वेबसाइट एवं मोबाइल ऐप प्रस्तुत किए, जबकि द्वितीय चरण ‘किसान की आवाज़’ में छात्रों ने किसानों की समस्याओं और समाधानों को प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। कृषिमंथन में नीलम कुमारी, आकांक्षा रावल और कुशाल फ़ौज़दार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कोमल प्रिय एवं दीपू कुमारी शाह द्वितीय स्थान पर रहीं। तृतीय स्थान कृष्णा कुमार राणा, ऋतिक सिंह राठौर, दाल चंद, अखिल त्रिपाठी तथा बीसीए के आदित्य सिंह एवं अनु को मिला।
‘किसान की आवाज़’ में पावनी वार्ष्णेय एवं मनीषा विजेता रहीं, उज्ज्वल गुप्ता द्वितीय तथा अभय कुमार तृतीय स्थान पर रहे। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।
डीन प्रोफेसर शैलेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को नवाचार-प्रेरित कार्यों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. आकांक्षा सिंह एवं डॉ. श्याम किशोर पटेल ने किया।
जीएलए : फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

जीएलए विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संकाय एवं कृषि विज्ञान केंद्र, दुवासु विश्वविद्यालय, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में फसल अवशेष प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। डीन प्रोफेसर शैलेश कुमार सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख प्रोफेसर वाई. के. शर्मा तथा मृदा विज्ञान विभाग के एसएमएस डॉ. रविंद्र कुमार राजपूत ने फसल अवशेष प्रबंधन के लाभों एवं अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय व कृषि संबंधी नुकसानों पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में छात्रों ने पोस्टर, वाद-विवाद, निबंध लेखन एवं रैली के माध्यम से जागरूकता संदेश दिया।
निबंध लेखन में सुदकिक्षा श्रीवास्तव प्रथम, दिशा बाजपेयी द्वितीय और यशवंत कुमार तृतीय रहे।
पोस्टर प्रतियोगिता में कोमल प्रिया प्रथम, दीपू कुमारी शाह द्वितीय और अमृता तृतीय रहीं।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में आयुष शंकर प्रथम, अरुणा पांडे द्वितीय और अमन सिंह तृतीय स्थान पर रहे।
सभी विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रविंद्र कुमार राजपूत एवं डॉ. सर्वेश सिंह ने किया।

