दैनिक उजाला, मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में संस्थापक दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्ष 1998 में जीएलए इंस्टीट्यूट की स्थापना से लेकर वर्ष 2010 में विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने तथा उसके बाद तक लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। समारोह में जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल ने सभी कर्मयोगियों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान को विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति बताया।
संस्थापक दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन तथा जीएलए के निनाद एवं नटराज क्लब के छात्रों की रंगारंग प्रस्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम के अवसर पर विश्वविद्यालय से 25 एवं अधिक वर्षों से जुडे़ शिक्षण वर्ग से कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, डीन एकेडमिक अफेयर्स डा. आशीष शर्मा, प्रोफेसर दीपक कुमार दास, डा. कमल शर्मा, डा. मनीष गोयल, डा. पियूष सिंघल एवं डा. विनय कुमार देवलिया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डा. मनोज कुमार अग्रवाल एवं डा. विवेक शर्मा को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास और गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

जीएलए के डिप्टी जनरल मैनेजर (मेंटेनेंस) हरिओम शर्मा, अकाउंट ऑफिसर कृष्ण मोहन सारस्वत, कारपेंटर सुखदेव, कंप्यूटर प्रोग्रामर तपेश दत्त भारद्वाज तथा असिस्टेंट लाइब्रेरियन सुशील कुमार सिंह को सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही हाउसकीपिंग विभाग के सदस्य भीख चंद, भूरा सिंह, प्रेमराज शर्मा, राजेन्द्र सिंह, राम प्रसाद, सतेंद्र पाल सिंह, सतीश कुमार गौतम एवं श्रीभान को उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
24 हजार से अधिक छात्रों के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर जीएलए

कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि जीएलए की यात्रा केवल एक शैक्षणिक संस्था से विश्वविद्यालय बनने की नहीं है, बल्कि यह उन समर्पित लोगों की यात्रा है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी संस्थान का साथ नहीं छोड़ा। वर्ष 1998 में सीमित संसाधनों तथा मात्र 240 छात्रों के साथ शुरू हुआ जीएलए, वर्ष 2010 में विश्वविद्यालय बनने के बाद वर्ष 2026 तक 24 हजार से अधिक छात्रों के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है और आज शिक्षा, शोध, नवाचार, तकनीकी विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
उन्होंने कहा कि जीएलए की प्रत्येक उपलब्धि के पीछे उन लोगों का परिश्रम और निष्ठा है, जिन्होंने वर्षों तक संस्था को अपने परिवार की तरह सेवा दी। इसी सेवा का प्रतिफल है कि अब ग्रेटर नोएडा में जीएलए विश्वविद्यालय का नया कैंपस भी खुल चुका है, जो आज शिक्षा, शोध और तकनीकी विकास के क्षेत्र में प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है।
संस्थापक दिवस को अब हर वर्ष मनाया जाएगा
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने बताया कि संस्थापक दिवस को अब हर वर्ष मनाया जाएगा, जिससे संस्थान की स्थापना से जुड़ी स्मृतियों, मूल्यों और विचारधारा को निरंतर सहेजा जा सके और नई पीढ़ी को विश्वविद्यालय की प्रेरक यात्रा से जोड़ा जा सके।
श्रद्धेय नारायणदास अग्रवाल की दूरदृष्टि और सतत मार्गदर्शन
सीईओ नीरज अग्रवाल, सीएफओ डा. विवेक अग्रवाल तथा कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय की प्रगति के मूल में कुलाधिपति श्रद्धेय नारायणदास अग्रवाल की दूरदृष्टि और सतत मार्गदर्शन है। उन्होंने बताया कि संस्थान की स्थापना से लेकर विश्वविद्यालय और ग्रेटर नोएडा कैंपस के विकास तक उनका नेतृत्व सदैव प्रेरणादायी रहा है। कुलाधिपति केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता और जनकल्याणकारी कार्यों में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। गुणवत्ता, मूल्य और अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने जीएलए को विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनका मार्गदर्शन विश्वविद्यालय परिवार के लिए संबल और दिशा दोनों है। जीएलए उनके नेतृत्व में शिक्षा, शोध और सामाजिक दायित्व के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय उनके मार्गदर्शन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
कार्यक्रम के अंत में डीन स्टूडेंट वेलफेयर डा. हिमांशु शर्मा ने सभी सम्मानितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया और विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ फाउंडेशन डे समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर डा. दिव्या गुप्ता ने किया।
इस अवसर पर गवर्निंग बाॅडी के सदस्य नरेन्द्र अग्रवाल, आईबीएम निदेशक डा. अनुराग सिंह, निहारिका सिंह, डा. ब्रजेश गोस्वामी सहित विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।

