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मां की ममता और प्रकृति की शक्ति का संगम ‘एक पेड़ मां के नाम‘ : नारायणदास

  • ‘एक पेड़ मां के नाम‘ पहल के तहत जीएलए विश्वविद्यालय में हुआ वृक्षारोपण

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल, कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, सीईओ नीरज अग्रवाल, सीएफओ विवेक अग्रवाल एवं कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने स्वयं जीएलए में वृक्षारोपण कर हरित और खुशहाल वातावरण का संदेश दिया।

पिछले वर्ष 7 हजार से अधिक पौधे रोपे गए। इस वर्ष 8500 से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। जिनमें 2500 से अधिक आंवला कलमी, अमरूद, जामुन, चीकू, किन्नो, मौसमी, बेल, बेर, अनार आम, आम देशी, जामुन कलमी, अमरूद, पाकल, आंवला, शहतूत, फालसा, खिरनी, सेमल, अर्जुन आदि फलों के वृक्ष रोपे गए हैं। इसके अलावा बरगद, पीपल, करंज, गुड़हल, चांदनी और अमलतास जैसे पौधों को भी शामिल किया गया है। हर पौधा धरती मां के प्रति समर्पण और प्रकृति के संरक्षण का प्रतीक माना जा रहा है।

वृक्षारोपण के दौरान कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल और सीईओ नीरज अग्रवाल ने आम का पौधा लगाया। कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता और सीएफओ विवेक अग्रवाल ने मौसमी का पौधा रोपित किया। कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने जामुन का पौधा लगाकर अभियान में अपनी भागीदारी निभाई।

इस अवसर पर कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने कहा कि “मां जीवन देती हैं और पेड़ प्रकृति को जीवन देते हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल केवल वृक्षारोपण नहीं है, बल्कि यह धरती मां के प्रति हमारे सम्मान, स्नेह और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह भी प्रयास है कि भीषण गर्मी के मौसम में जीएलए का हरित कैंपस बाहर के तापमान की तुलना में कम से कम 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम बना रहे, जिससे विद्यार्थियों और स्टाफ को एक स्वस्थ, शांत और पर्यावरणीय रूप से संतुलित वातावरण मिल सके।”

“मेरी व्यक्तिगत भावना है कि इस पहल को गतिविधि नहीं, बल्कि एक संस्कार बनाकर अपनाया जाए। आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा वातावरण मिले, जहां न केवल पेड़ हों, बल्कि उन पेड़ों के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी हो। हम चाहते हैं कि हर विद्यार्थी जब जीएलए से विदा ले, तो वह एक पेड़ अपनी मां के नाम पर छोड़ जाए-एक स्मृति, एक प्रण और एक जिम्मेदारी के रूप में।”

कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों को भी बखूबी निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरणीय पहल विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने के साथ ही मातृत्व की भावना को और प्रबल करने वाला है।

पौधों की देखरेख के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी

सीईओ नीरज अग्रवाल और सीएफओ विवेक अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय का हॉर्टीकल्चर विभाग और एनएसएस तथा एनसीसी इकाई पर्यावरणीय क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। पौधों की देखरेख के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे पौधों का संरक्षण व विकास नियमित रूप से हो सके।

कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वृक्षारोपण, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, वृहद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा जैसे प्रकल्पों के कारण आज जीएलए विश्वविद्यालय हरित कैंपस के सभी मानकां को पूरा करता है।

इस अवसर पर हॉर्टीकल्चर विभाग के अधीक्षक गुलाब सिंह, विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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