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केएम विश्वविद्यालय : कुलाधिपति ने चिकित्सकों के साथ पौधा लगाकर की अनूठी पहल की शुरूआत

  • कुलाधिपति ने चिकित्सकों के साथ पौधा लगाकर की अनूठी पहल की शुरूआत

मथुरा : केएम विश्वविद्यालय के मेडीकल एंड हॉस्पिटल में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का समापन अनूठी पहल के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी ने अस्पताल के सभी विभागाध्यक्षों एवं पीजी-यूजी छात्र-छात्राओं के साथ पौधारोपण करके किया। इससे पूर्व ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह की थीम ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट होने को लेकर जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन नेत्ररोग विभाग द्वारा किया गया तथा प्रतियोगिता विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर कुलाधिपति ने सम्मानित करते हुए कहा आंख हमारे शरीर और जीवन का महत्वपूर्ण अंग है, आंखों से ही मन में इच्छा जागृत होकर दिमाग को संकेत देती है, उसके बाद शरीर उस कार्य को करता है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों से देश के भविष्य (एमबीबीएस) छात्रों को सीखनें को मिलेगा क्योंकि शिक्षा के साथ विद्या मिल जाए तो व्यक्ति सफलताओं की ऊंचाईयों को छू लेता है।

केएम मेडीकल कालेज एंड हॉस्पिटल द्वारा आज विश्व ग्लूकोमा सप्ताह समापन ‘ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट होना’ विषय पर जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ विवि के कुलाधिपति किशन चौधरी, कुलपति डा. एनसी प्रजापति, प्रतिकुलपति/फॉरेन्सिक मेडिसिन प्रोफेसर डा. शरद अग्रवाल, मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे, एडीशनल मेडीकल सुप्रीडेंट डा. नमित गौतम, डा. आरपी गुप्ता ने संयुक्त रूप से सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित एवं माला पहनाकर किया।

मंच की अध्यक्षता एवं संचालन डा. यशी पांडेय ने की। नेत्ररोग विभाग के चिकित्सकों द्वारा बनाई गई जागरूकता वीडियो को दर्शाया गया। नेत्र विभाग की प्रोफेसर डा. निधि जैन ने विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ग्लूकोमा को “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर बिना लक्षणों के धीरे-धीरे दृष्टि छीन लेता है और दुनिया में अपरिवर्तनीय अंधता का प्रमुख कारण है। हर साल का बढ़ता आंकड़ा बताता है कि 2040 तक यह ग्लूकोमा 11 करोड़ लोगों को चपेट में ले लेगा।

उन्होंने कहा ग्लूकोमा में आंख के अंदर का दबाव बढ़ने लगता है, जिससे आप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। यह नर्व आंखों से दिमाग तक दृश्य संकेत पहुंचाने का काम करती है। यदि समय रहते बीमारी की पहचान नहीं हो पाती है तो धीरे-धीरे दृष्टि कम होने लगती है और स्थायी अंधापन भी हो सकता है। 40 वर्ष की उम्र के पश्चात अपनी आंखों की नियमित जांच जरूर करवाएं एवं जिन लोगों को डायबिटीज है अथवा घर में ग्लूकोमा का पारिवारिक इतिहास है तो आवश्यक रूप से ग्लूकोमा की जांच करवाएं। क्योंकि इस रोग के निदान के लिए इसका जल्दी पता लगाना अति आवश्यक है ताकि समय रहते इसको कंट्रोल किया जा सके।

विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने कहा इस बीमारी से परिवार और समाज के लोगों को जागरूक करना चाहिए और परेशान लोगो को अस्पताल लाने का प्रयास करना चाहिए। इस जागरूकता कार्यक्रम के लिए नेत्ररोग विभाग की टीम को बधाई देता हूं। प्रतिकुलपति/फॉरेन्सिक मेडिसिन प्रोफेसर डा. शरद अग्रवाल ने नेत्र विभाग की टीम के जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की और ग्लूकोमा से बचाव के टिप्स सभी के साथ साझा किये।

कार्यक्रम को सफल बनाने में नेत्ररोग विभाग की डाक्टर्स टीम में असिडेंट प्रोफेसर डा. निधि जैन, डा. गौहर जहां, जेआर डा. परिधि गुप्ता, डा. रवि सोनी, डा. नितिन घई, डा. हिमानी मिसूर्या, डा. आयुष पांडेय, डा. दिलीसा, डा. मनन कुमार, डा. यशी पांडेय, डा. अक्षय, डा. दीपक, डा. गुड़िया, डा. कुशग्रह गर्ग, डा. दिवांशी, डा. कूकू, डा. ऋषिका, डा. प्रतिक्षा, डा. सचिन विशेष सहयोग रहा।

कुलाधिपति ने डाक्टरों संग किया करीब 80 पौधारोपण

कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय परिसर में कुलाधिपति किशन चौधरी ने स्नेह और दुलार के साथ पौधारोपण किया और जल डाला। इसी प्रकार से अस्पताल के मेडीसन विभाग के एचओडी डा. आरपी गुप्ता, सर्जरी विभागध्यक्ष डा. अजय अग्रवाल, स्त्रीरोग विभाग से डा. ऐश्वर्या त्रिपाठी, हड्डी विभाग के डा. रामधन, रेडियोलॉजी से डा. हर्ष शांडिल्य, ईएनटी विभागध्यक्ष डा. शिवांगी, स्क्रीन बीडी एचओडी डा. रामावतार बम्ब, टीवी चेस्ट विभाग से डा. सिद्धार्थ, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डा. एमके तनेजा, मनोरोग विभागध्यक्ष डा. नमित गौतम सहित अन्य विभागाध्यक्षों ने अपनी यूजी-पीजी इंटर्न टीम के साथ पौधारोपण किया और पौधो की देखभाल करने का संकल्प लिया।

पोस्टर प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक से दी सीख
जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए इंटर्न छात्रों के मध्य एक पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता का मूल्यांकन एडीशनल मेडीकल सुप्रीडेंट डा. आरपी गुप्ता ने किया। जिसमें प्रथम डा. समृद्धि जयसवाल (इंटर्न), द्वितीय एमबीबीएस बैच 2023 की डा. मंजेश, डा. काजल पुंडीर, डा. मानसी श्रीवास्तव इंटर्न ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं छात्र-छात्राओं द्वारा एक प्रभावी नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसके जरिए अस्पताल में आए मरीजों और तीमारदारों को सरल भाषा में ग्लूकोमा के लक्षणों और उपचार के बारे में बताया गया।

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