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Wed. Feb 11th, 2026

45 पैसे के इंश्योरेंस में मिले 10 लाख:ट्रेन हादसे में मौत के 5 साल बाद मिला न्याय; टिकट बुक करते समय ना करें यह चूक

भोपाल : मुरैना जिले के रवि कुमार शर्मा ने 19 अक्टूबर 2020 को मुरैना से निजामुद्दीन जाने के लिए भोपाल एक्सप्रेस का ऑनलाइन टिकट बुक किया था। टिकट के साथ महज 45 पैसे का ट्रेवल इंश्योरेंस भी लिया था। 21 अक्टूबर 2020 की रात करीब 3:20 बजे मुरैना रेलवे स्टेशन पर तेज बारिश और अंधेरे के बीच बिजली गुल थी।

प्लेटफॉर्म पर कोच नंबर बताने वाला डिस्प्ले बोर्ड भी बंद था। जब रवि कुमार शर्मा अपने आवंटित डी-1 कोच तक पहुंचे तो गेट बंद मिला। वे दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगा ही रहे थे कि ट्रेन अचानक चल पड़ी। पायदान पर चढ़ चुके रवि कुमार शर्मा का पैर फिसल गया। वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिर पड़े।

बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया, उपभोक्ता आयोग पहुंचे परिजन

इसके बाद उन्हें 108 एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पत्नी मनीषा शर्मा ने आईआरसीटीसी को घटना की सूचना दी। निर्देश मिलने पर उन्होंने बीमा कंपनी बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस में अगस्त 2021 में सभी दस्तावेजों के साथ क्लेम किया।

इसके बावजूद बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया। कंपनी यह कहकर मामला टालती रही कि दस्तावेज पूरे नहीं हैं। जनवरी 2022 में भी दस्तावेज दोबारा दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।आखिरकार, मामला भोपाल उपभोक्ता आयोग पहुंचा।

सुनवाई के बाद कमीशन ने इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत की तारीख से 7 परसेंट सालाना ब्याज के साथ 10 लाख देने का आदेश दिया। साथ ही इंश्योरेंस कंपनी को 2 महीने के अंदर मानसिक, शारीरिक और फाइनेंशियल नुकसान के लिए अलग से 10 हजार और मुकदमे के खर्च के तौर पर 5 हजार देने का भी आदेश दिया। तय समय में पेमेंट न करने पर 9 परसेंट ब्याज लगेगा।

आयोग की बेंच 2 ने सुनाया फैसला।

आयोग की बेंच 2 ने सुनाया फैसला।

उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला

बीमा राशि न मिलने से परेशान होकर मनीषा शर्मा ने 30 सितंबर 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल की बेंच-2 में परिवाद दायर किया। परिवाद में कहा गया कि यात्रा के दौरान दुर्घटना हुई, बीमा लिया गया था।

इसके बावजूद भुगतान न करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है। यह फैसला आयोग की बैंच 2 की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह सदस्य अंजुम फिरोज ने सुनाया।

आयोग ने क्या माना, क्या नहीं माना

  • रवि कुमार शर्मा के पास वैध रेल टिकट और ट्रेवल इंश्योरेंस था।
  • दुर्घटना यात्रा के दौरान हुई।
  • पोस्टमॉर्टम, मृत्यु प्रमाण पत्र, FIR और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज बीमा कंपनी को दिए जा चुके थे।
  • बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कोई अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए थे।
  • आयोग ने यह भी माना कि IRCTC की भूमिका टिकट बुकिंग तक सीमित थी।
  • बीमा भुगतान की जिम्मेदारी पूरी तरह बीमा कंपनी की थी।
मृतक की पत्नी मनीषा की तस्वीर है।

मृतक की पत्नी मनीषा की तस्वीर है।

आयोग ने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने समय पर क्लेम का निराकरण नहीं किया, जबकि आईआरसीटीसी और बीमा कंपनी के बीच हुए अनुबंध में 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। इसके बावजूद दो साल तक भुगतान न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है।

आयोग का स्पष्ट आदेश

भोपाल उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह 10 लाख रुपए की बीमा राशि परिवाद दायर करने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दे। इसके अलावा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के लिए अलग से 10 हजार रुपए। लिटिगेशन एक्सपेंस के रूप में 5 हजार रुपए 2 माह के भीतर भुगतान करे। तय समय में भुगतान न होने पर ब्याज दर 9 प्रतिशत होगी।

अधिवक्ता बोले- एक क्लिक का बीमा, परिवार का सहारा

मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरुण सिंह राणा का कहना है कि यह केस हर रेल यात्री के लिए जागरूकता का उदाहरण है। टिकट बुक करते समय एक क्लिक में लिया गया बीमा हादसे की स्थिति में परिवार को इधर-उधर भटकने से बचा सकता है।

उन्होंने कहा कि समय पर पेमेंट करना इंश्योरेंस कंपनी की जिम्मेदारी थी, लेकिन देरी के कारण परिवार को कोर्ट जाना पड़ा।

अधिवक्ता अरुण सिंह राणा ने मामले की पैरवी की है।

अधिवक्ता अरुण सिंह राणा ने मामले की पैरवी की है।

पत्नी बोली- हादसे की जिम्मेदार सिर्फ रेलवे

मृतक की पत्नी मनीषा शर्मा ने बताया कि पति की मौत के बाद जीवन पूरी तरह बदल गया। घर में दो बेटियां, एक बेटा और सास-ससुर हैं। वह सिलाई का काम कर किसी तरह घर चला रही हैं। मनीषा शर्मा का कहना है कि इस हादसे के लिए रेलवे की लापरवाही जिम्मेदार है और आयोग के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।

हर यात्री के लिए सबक

यह मामला बताता है कि रेल टिकट बुक करते समय ट्रेवल इंश्योरेंस पर टिक न करना एक छोटी सी चूक हो सकती है, लेकिन हादसे की स्थिति में यही चूक परिवार के लिए भारी नुकसान बन जाती है। रवि कुमार शर्मा द्वारा लिए गए महज 45 पैसे के बीमे ने उनके परिवार को 10 लाख रुपए का कानूनी हक दिलाया।

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