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नीतीश के इस्तीफे ने बदल दिया बिहार लोकसभा चुनाव का गणित

नई दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे ही इंडिया गठबंधन से बाहर आते ही गठबंधन का गणित बिगड़ गया है। बदले सियासी समीकरण का असर उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली में भी देखने को मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी और पंजाब-दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आप के साथ भी कांग्रेस के हित टकरा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो लोकसभा सीटें देने का प्रस्ताव दिया। यह कांग्रेस पार्टी के गले नहीं उतर रहा है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लगतार बयान दे रहे हैं तो टीएमसी के डोरेक ओब्रायन गठबंधन में खटास के लिए चौधरी को जिम्मेदार बता हैं। पिछले दिनों केजरीवाल ने खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की थी लेकिन सीटों के बंटवारे पर कोई फैसला सामने नहीं आया।

बिहार में कांग्रेस, आरजेडी, आरएलएसपी, एचएएम, वीआइपी ने 2019 में मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। आरजेडी 19, कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव लड़ी। आरजेडी का पूरा सफाया हो गया था और एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि, कांग्रेस का एक सांसद निर्वाचित हुआ था।

जेडीयू के साथ आने से कांग्रेस को उम्मीद थी कि बिहार में इंडिया गठबंधन अच्छा प्रदर्शन करेगा और भाजपा की सीटें कम हो सकेंगी। नीतीश के अब भाजपा के साथ जाने से एक बार फिर से दलित-मुस्लिमों वोटों का बंटवारा देखने को मिल सकता है। इसका सीधा नुकसान आरजेडी और कांग्रेस को होगा।

इंडिया गठबंधन बनाने की शुरुआत जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने ही की थी लेकिन गठबंधन में उन्हें कोई पद नहीं मिला। कांग्रेस लगातार हावी होती चली गई। इससे नीतीश की नाराजगी बढ़ती गई। बिहार में जेडीयू 17 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन कांग्रेस ने सीट बंटवारे पर चर्चा तक नहीं की। इसे लेकर नीतीश नाराज थे।

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बिहार में 20 से 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पहले की तरह ही 17 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड को चुनाव लड़ाया जाएगा। भाजपा के सामने संकट ये है कि जीतनराम मांझी को कैसे एडजस्ट करे।

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