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Wed. Apr 1st, 2026

बांग्लादेशी हिंदू बोले- भारत की जेल मंजूर, लौटेंगे नहीं:त्रिपुरा के अस्पताल-होटलों में बांग्लादेशी बैन

अगरतला : बांग्लादेश में 5 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार गिरने के बाद से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। इस्कॉन से जुड़े धर्मगुरु चिन्मय प्रभु को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। बांग्लादेश के ब्राह्मणबारिया जिले में 30 नवंबर को त्रिपुरा से ढाका होते हुए कोलकाता जा रही एक बस पर हमला हुआ।

इसके बाद त्रिपुरा में बांग्लादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। अगरतला में बांग्लादेशी हाई कमीशन में तोड़-फोड़ की गई। त्रिपुरा के होटल एसोसिएशन और एक हॉस्पिटल ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए अपनी सेवाएं बंद कर दीं। बांग्लादेश ने भी अगरतला में अपनी वीजा सेवाएं रोक दीं और त्रिपुरा से अपने डिप्लोमैट्स वापस बुला लिए।

त्रिपुरा तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। इसका पड़ोसी देश से सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहा है। बांग्लादेश में खतरे के चलते हिंदू आबादी बड़ी तादाद में देश छोड़कर त्रिपुरा के जरिए भारत में अवैध तरीके से घुस रही है। ​​​​उनका कहना है कि वे भारत की जेल में रह लेंगे, लेकिन वापस बांग्लादेश नहीं जाएंगे।

‘बांग्लादेश से आने वाली बसें खाली, जाने वालों की संख्या भी कम’

भारत और बांग्लादेश के बीच बस ऑपरेटर कंपनी श्यामोली परिवहन प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर विकास चक्रवर्ती ने बताया कि 30 नवंबर को अगरतला-कोलकाता बस पर बांग्लादेश में हमले के बाद यात्रियों की संख्या में बहुत कमी आई है। पहले भारत और बांग्लादेश के लोग बड़े पैमाने पर आना-जाना करते रहे हैं।

‘नवंबर तक बांग्लादेश से आने-जाने वाली बसों की सीटें हर रोज भरी होती थीं। अब हालात बदल गए हैं। 6 दिसंबर को बांग्लादेश से एक बस अगरतला पहुंची। उसमें एक भी पैसेंजर नहीं था। 7 दिसंबर को अगरतला से ढाका के लिए 20 लोगों ने टिकट बुक किए। इनमें 14 भारतीय और 6 बांग्लादेशी नागरिक थे।’

अगरतला में श्यामोली परिवहन का टिकट काउंटर 6 दिसंबर को पूरा खाली दिखाई दिया।

अगरतला में श्यामोली परिवहन का टिकट काउंटर 6 दिसंबर को पूरा खाली दिखाई दिया।

होटल एसोसिएशन बोला- नुकसान मंजूर, देश का अपमान नहीं सहेंगे

त्रिपुरा के सभी होटलों ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए सेवाएं बैन कर दी हैं। अशांति से पहले हर महीने करीब 2-3 सौ बांग्लादेशी अगरतला के अस्पतालों में इलाज के लिए आते थे। होटलों में बैन के चलते अब मरीजों और उनके परिजनों को ठहरने में मुश्किल हो रही है।

ऑल त्रिपुरा होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन (ATHROA) के कोषाध्यक्ष, विश्वजीत पाल ने फोन पर बताया कि बांग्लादेश में भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया है। बांग्लादेश में भारतीय बस यात्रियों को परेशान किए जाने और हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार के कारण एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है।

विश्वजीत पाल ने कहा, ‘अगर इस फैसले से हमारे बिजनेस को नुकसान होता है तो हमें इसकी परवाह नहीं है। हम देश का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश के लिए हम व्यापारिक नुकसान झेलने को भी तैयार रहते हैं।’

CM बोले- मेडिकल सेवाएं नहीं देना अस्पतालों का निजी फैसला

अगरतला के सबसे बड़े हॉस्पिटल्स में शुमार ILS सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने 2 दिसंबर को बांग्लादेशी नागरिकों को इलाज नहीं देने का ऐलान किया। यहां बॉर्डर पार से हर महीने लगभग 100 बांग्लादेशी मरीज इलाज के लिए आते थे।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रोफेसर डॉ. माणिक साहा ने ILS हॉस्पिटल के इस फैसले पर कहा, ‘मैं एक डेंटिस्ट हूं। डॉक्टर के नाते मरीज हमारी प्राथमिकता है। हालांकि, अगर कोई प्राइवेट हॉस्पिटल बांग्लादेशी नागरिकों को मेडिकल सेवाएं नहीं देना चाहता है तो यह उनका निजी फैसला है। मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है।’

बांग्लादेश में अशांति पर त्रिपुरा CM ने कहा, ‘जो हो रहा है, वह ठीक नहीं है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मामले में जल्दी कार्रवाई करेगी। मैंने बॉर्डर इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने का भी आदेश दिया है।’

पूर्व CM बोले- यहां के प्रदर्शनकारियों और बांग्लादेशी अपराधियों में फर्क नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने त्रिपुरा में बांग्लादेश के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को एक खास वर्ग की साजिश करार दिया। पूर्व CM ने कहा, ‘बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले और अत्याचार निंदनीय है, लेकिन त्रिपुरा में विरोध के नाम पर एक वर्ग अपना हित साधने की कोशिश कर रहा है।’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘विरोध करने वाले लोग केवल बांग्लादेश के हिंदुओं की बात कर रहे हैं। दूसरे धर्मों के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की बात कोई नहीं कर रहा है। त्रिपुरा में बांग्लादेशी हाई कमीशन में घुसकर बांग्लादेशी राष्ट्रीय ध्वज को तोड़ दिया गया। यह कैसा विरोध है। यहां विरोध करने वालों और बांग्लादेश के अपराधियों में कोई अंतर नहीं रह गया है।’

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