- पश्चिम बंगाल में राज्यपाल के अचानक इस्तीफे और नए राज्यपाल की नियुक्ति के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्मने लगा है। राज्य में पहले से ही वोटर लिस्ट संशोधन और चुनावी तैयारियों को लेकर बहस चल रही थी। इसी बीच राज्यपाल सी वी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे और उनकी जगह तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि की नियुक्ति ने नई सियासी चर्चा शुरू कर दी है, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
TMC ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बोस के अचानक पद छोड़ने के बाद केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के राज्यपाल और पूर्व आईपीएस अधिकारी आर एन रवि को राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में करीब डेढ़ से दो महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने कहा कि राज्यपाल के इस्तीफे के पीछे की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उन्हें आशंका है कि इस फैसले के पीछे राजनीतिक दबाव हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नए राज्यपाल की नियुक्ति से पहले परामर्श में शामिल नहीं किया गया, जो स्थापित परंपरा के खिलाफ है।
राज्य में इस समय स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत वोटर लिस्ट का व्यापक संशोधन चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया में लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि करीब 60 लाख मतदाताओं के नाम अभी जांच के तहत रखे गए हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है और इसके जरिए चुनाव से पहले मतदाता संतुलन बदलने की कोशिश हो रही है। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि यह सब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक सोची समझी रणनीति हो सकती है ताकि चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन लगाया जा सके।
बीजेपी ने आरोपो को किया खारिज
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। भाजपा विधायक और अर्थशास्त्री अशोक लाहिरी ने कहा कि पार्टी का बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने का कोई इरादा नहीं है। उनके अनुसार भाजपा चाहती है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाए और फिर समय पर चुनाव कराए जाएं। लाहिरी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कथित घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उनके मुताबिक तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर राजनीतिक जिम्मेदारी भाजपा पर डालना चाहती है।

