- पांडेय समाज के लोग बोले दाऊजी मंदिर नहीं जिला पंचायत ले केस वापस
- पांडेय समाज बोला रिसीवर ने अपने नाम जिला पंचायत अध्यक्ष से कहकर खुद लिखवाया आधारहीन पत्र
दैनिक उजाला, बलदेव/मथुरा: बीते दशकों से दाऊजी मंदिर बनाम जिला पंचायत मथुरा का एक वाद जिला न्यायालय में दायर है। अभी तक इस वाद का समाधान भी नहीं निकला है कि बीते कई वर्षों से एक परिषदीय शिक्षक के रिसीवर बनने के कारण इस केस की पैरवी में थोड़ी तेजी आयी। इसके बाद रिसीवर के साथ दारोमदार रखने वाले वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष के कुर्सी पर जमते ही रिसीवर की पौ बारह हो गयी। अब जिला पंचायत अध्यक्ष के माध्यम से एक नया सिगूफा पांडेय समाज को देने की तैयारी में है, जो कि समाज के लोगों को निराश करेगा।
एडवोकेट कुलदीप पांडेय कहते हैं कि वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ी चिकित्सालय बनी भूमि दाऊजी मंदिर की है। इस भूमि पर दाऊजी मंदिर का पूर्ण हक है। रिसीवर एवं परिषदीय शिक्षक ने जानबूझकर जिला पंचायत अध्यक्ष से कहकर अपने नाम एक पत्र लिखवाया है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि मंदिर रिसीवर और जिला पंचायत अध्यक्ष एक सिक्के के दो पहलू हैं। एडवोकेट पांडेय का कहना है कि अगर बृज तीर्थ विकास परिषद को जमीन चाहिए तो, वह मंदिर से इस हक को मांगे। इसका मतलब ये नहीं है कि जिला पंचायत अध्यक्ष मंदिर के रिसीवर के माध्यम से न्यायालय में दायर वाद को वापस लेने का दवाब बनाये। अगर वाद को मंदिर वापस ले लेगा तो, जमीं पर मंदिर का अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा और जिला पंचायत मथुरा का बल और बढ़ जायेगा।
पांडेय समाज की मांग है कि जिला पंचायत इस केस को वापस ले, तब कहीं दाऊजी मंदिर ट्रस्ट ब्रज तीर्थ विकास परिषद को इस जमीं पर टीएफसी बनाने के लिए देने पर विचार करेगा। दाऊजी मंदिर इस केस को वापस लेने के लिए बिल्कुल आगे आने के विचार में नहीं है। जिला पंचायत चाहे तो अपनी अनापत्ति दर्ज कर वापस ले सकता है।
नगर पंचायत की जमीं पर बनाएं टीएफसी
बलदेव नगर पंचायत के पास भी जमीन की कोई कमी नहीं है। अगर ब्रज तीर्थ विकास परिषद या जिला पंचायत मथुरा को टीएफसी की अब जाकर सुद लगी है तो नगर पंचायत की कस्बा बलदेव के अंदर कई बीघा जमीं खाली पड़ी है। इस खाली जमीं पर भी टीएफसी की सुविधा दी जा सकती है, लेकिन इस मंदिर की जमीं पर टीएफसी क्यों।

