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‘50 लाख घूस मांगता है आपका अफसर…’ पप्पू यादव ने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को घेरा, CO पर लगाए गंभीर आरोप

  • पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और उनके विभाग को घेरा है

पटना : बिहार में जमीन और उसके म्यूटेशन से जुड़ा भ्रष्टाचार एक बार फिर एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रहा है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के बिहार में जमीन माफियाओं को ‘ठंडा’ करने के दावे पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने एक सर्कल ऑफिसर (CO) पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके दावा किया कि पूर्णिया का एक अंचल अधिकारी म्यूटेशन के लिए खुलेआम 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगता है और अगर पैसे नहीं दिए जाते हैं, तो पहले से मंजूर किए गए म्यूटेशन को भी रद्द कर देता है।

क्या कहा पप्पू यादव ने?

पप्पू यादव ने अपने पोस्ट में सीधे-सीधे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को टैग करते हुए लिखा, “बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा जी, बड़ी-बड़ी बातें करने से कुछ नहीं होगा, आपका CO ही सबसे बड़ा भूमाफिया है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केनगर अंचल के CO जमीन म्युटेशन के लिए खुलेआम 50 लाख रुपये की मांग करते हैं। सांसद का दावा है कि यदि आवेदक घूस देने से इनकार करता है, तो उसी जमीन का म्युटेशन, जिसे एक साल पहले स्वीकृति दी जा चुकी होती है, उसे रद्द कर दिया जाता है।

विजय सिन्हा ने का किया है दावा?

दरअसल, हाल ही में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने सार्वजनिक मंच से ऐलान किया था कि बिहार में भू-माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। 18 दिसंबर को पटना में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि जिस तरह खनन माफिया पर कार्रवाई कर उन्हें ‘ठंडा’ किया गया, उसी तरह अब भू-माफिया पर भी सख्त शिकंजा कसा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेताया था कि जो भी विभाग को कलंकित करेगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई तय है। जिसके बाद अब सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर ये पोस्ट किया है।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

पप्पू यादव के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने इसे सिर्फ पूर्णिया नहीं, बल्कि पूरे बिहार की समस्या बताया। सोम नाम के एक यूजर ने लिखा कि म्युटेशन में रिश्वत की समस्या हर ब्लॉक में है। बिना पैसे दिए फाइल आगे नहीं बढ़ती और क्लॉज लगाकर मामला लटका दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जमीन में इतनी ही समस्या होती है, तो रजिस्ट्री के वक्त लाखों रुपये का टैक्स सरकार कैसे ले लेती है?

अनुपम पांडे नाम के यूजर ने लिखा कि ऐसे आरोपों पर संज्ञान लेने से अब अधिकारियों पर दबाव पड़ने के बजाय रिश्वत की रकम और बढ़ सकती है। उनका कहना था कि कोर्ट में मामला साबित होते-होते अधिकारी रिटायर हो जाता है और पीड़ित थक-हारकर लड़ाई छोड़ देता है।

कुछ यूजर्स ने इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से भी देखा। राकेश नाम के एक यूजर ने पप्पू यादव की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा कि यह सब आम बात है और नेताओं को सिर्फ अफसरों पर ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठाना चाहिए। उन्होंने पुराने राजनीतिक मामलों का जिक्र करते हुए न्याय व्यवस्था और नेताओं की भूमिका पर भी कटाक्ष किया।

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