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Wed. Feb 11th, 2026

“मोटी, काली” कहकर पत्नी को ताने मारता था, गोरा करने के बहाने केमिकल लगाकर जिंदा जलाया, मिली फांसी की सजा

  • उदयपुर में एक शख्स को 8 साल बाद फांसी की सजा सुनाई गई है, शख्स अपनी पत्नी को गोरा करने वाली दवा के बहाने शरीर पर केमिकल लगाकर अगरबत्ती से जिंदा जला दिया था

उदयपुर : राजस्थान के उदयपुर जिले के मावली कोर्ट ने अपने एक फैसले में पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले एक शख्स को 8 साल बाद फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला 24 जून 2017 को हुई एक नृशंस घटना से जुड़ा है, जिसमें किशनदास उर्फ किशनलाल ने अपनी पत्नी लक्ष्मी को “काली और मोटी” कहकर ताना मारता था और फिर गोरा करने वाली दवा के बहाने शरीर पर केमिकल लगाकर अगरबत्ती से जिंदा जला दिया, जिसकी बाद में मौत हो गई। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को गर्दन से तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत ना हो जाए। आरोपी ने जो किया वह सिर्फ उसकी पत्नी लक्ष्मी के साथ ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के साथ अपराध है।

“गोरा होने की दवा लेकर आया हूं”

दरअसल, वल्लभनगर थाना क्षेत्र के नवाणिया गांव की निवासी लक्ष्मी वैष्णव ने अपनी मृत्यु से पहले कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। उसने बताया कि उसके पति किशनदास उसे अक्सर “काली व मोटी” कहकर ताना मारता था। 24 जून 2017 की रात करीब 11 बजे लक्ष्मी अपने पति किशनदास के साथ कमरे में थी। पत्नी ने लक्ष्मी को निर्वस्त्र कर कहा कि वह उसके लिए गोरा होने की दवा लेकर आया है, इस दवा को लगाने से वह गोरी हो जाएगी। यह कहते हुए पति ने भूरे रंग का केमिकल लक्ष्मी के ऊपर लगा दिया, जिससे बदबू आ रही थी। केमिकल लगाने के बाद पति ने अगरबत्ती से आग लगा दी और दरवाजा खोलकर भागने से पहले बोतल में बचा केमिकल भी उस पर डाल दिया। 

जब लक्ष्मी दर्द से चिल्लाई, तो उनके सास-ससुर और ननद ने आकर पानी डालकर आग बुझाई। लक्ष्मी ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि इस भयानक कृत्य में उनके पति के अलावा और कोई शामिल नहीं था। कुछ समय बाद उदयपुर के एक निजी अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई।

आरोप साबित करने के लिए 14 गवाह

वल्लभनगर थाना पुलिस ने किशनदास के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ जांच पूरी कर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। मावली के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय में चले इस मुकदमे में अपर लोक अभियोजक दिनेशचंद्र पालीवाल ने आरोपी पर आरोप सिद्ध करने के लिए 14 गवाहों और 36 दस्तावेजों को पेश किया। मृतका का मृत्युकालिक बयान, एफएसएल रिपोर्ट और चिकित्सकीय साक्ष्य निर्णायक साबित हुए।

पीठासीन अधिकारी राहुल चौधरी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी किशनदास को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी पाया और उसे मृत्युदंड के साथ-साथ 50,000 रुपये का जुर्माना भी सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए। हालांकि, उसे धारा 304बी के अपराध से बरी कर दिया गया।

न्यायपालिका का कठोर संदेश

न्यायाधीश राहुल चौधरी ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि इस तरह के जघन्य अपराधों में नरमी का रुख अपनाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने कहा, “यह अपराध केवल उसकी पत्नी के साथ नहीं, बल्कि पूरी मानवता के साथ किया गया है।” उनका मानना था कि ऐसे मामलों में मृत्युदंड देना ही न्यायसंगत है ताकि समाज की न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे और भविष्य में ऐसे कृत्यों को रोका जा सके।

अपर लोक अभियोजक दिनेशचंद्र पालीवाल ने भी तर्क दिया कि आरोपी का यह कृत्य समाज को अंदर तक हिला देने वाला है और उसे माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आरोपी को सुधारा नहीं जा सकता और उसे वापस समाज में शामिल नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।

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