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Tue. Mar 3rd, 2026

ऐसे शिक्षक नहीं चाहते कि बदले यूपी बेसिक शिक्षा की तस्वीर

  • दाऊजी मंदिर के रिसीवर एवं परिषदीय शिक्षक ने कभी बेसिक शिक्षा की तस्वीर का नहीं किया बखान
  • सरकार के प्रयास बदले शिक्षा की तस्वीर, मंदिर रिसीवर जैसे शिक्षक सरकार के प्रयासों को बता रहे धता

मथुरा : यूपी बेसिक शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए यूपी सरकार नित-प्रतिदिन नए फाॅर्मूले पर कार्य कर रही है, लेकिन ऐसा एक परिषदीय शिक्षक जो सरकार के आदेशों को धता बताकर खुलेआम मंदिर की रिसीवरगिरी में पूरा समय व्यतीत कर कभी भी बेसिक शिक्षा की तस्वीर का बखान तक नहीं करना चाहता। आखिर ऐसा क्या है जो सरकारी वेतन मिलने के बावजूद भी शिक्षकगिरी को छोड़ रिसीवरगिरी के मोह में यह शिक्षक लगा हुआ है।

विदित रहे कि दाऊजी मंदिर के रिसीवर एवं नौहझील ब्लाॅक के उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरई में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात आरके पांडेय यानि रामकटोर पांडेय ने अपने स्कूल की बात तो छोड़ो कभी भी यूपी बेसिक शिक्षा की तस्वीर को अपनी फेसबुक पर साझा करना तो बहुत दूर की बात है, बल्कि इसका कहीं भी आज तक बखान तक नहीं किया। साथ ही न कभी स्कूल चलो शिक्षा अभियान मंे प्रतिभाग किया।

जबकि देखा जाय तो परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर को बदलने के लिए नित-प्रतिदिन योगी सरकार नए फाॅर्मूले पर कार्य कर रही है। अधिकतर जिलों के स्कूलों का बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद लगातार दौरा कर रहे हैं और अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कार्यवाही कर रहे हैं, दुर्भाग्यवश रिसीवर बने बैठे परिषदीय शिक्षक रामकटोर पांडेय की अनुपस्थिति अभी महानिदेशक से दूर है।

हालात ये हैं कि अपनी फेसबुक वाॅल पर भी परिषदीय शिक्षक ने रिसीवर का झंडा लहरा रखा है। जबकि अधिकांश परिषदीय शिक्षक अपने स्कूल को संवारने से लेकर बच्चों की पढ़ाई के साथ वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। अगर देखा जाय तो रिसीवर आरके पांडेय के नाम जारी फेसबुक वाॅल पर विजिट कर अधिकारी जांच कर सकते हैं।

सरकारी शिक्षक की फेसबुक बनी राजनीतिज्ञ
नौहझील ब्लाॅक के उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक आरके पांडेय यानि रामकटोर पांडेय की फेसबुक वाॅल प्राथमिक शिक्षा के बखान को छोड़ राजनीतिज्ञ है। इस फेसबुक वाॅल पर राजनेताओं से लेकर अधिकारियों को प्रसाद देते हुए के फोटो मिलेंगे। शिक्षक दिखाना चाहते हैं कि वह इतने बडे़ राजनेताओं और अधिकारियों से संपर्क में हैं कि स्कूल जाने की और बेसिक शिक्षा का बखान करने की आवश्यकता ही शायद दिखाई नहीं देती।

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