मथुरा (बलदेव) : प्रसूता और नवजात शिशु की मौत के गंभीर मामले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। थाना बलदेव में नामजद FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार में आक्रोश है।
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब क्षेत्राधिकारी (CO) द्वारा पीड़ित पक्ष से यह कहा गया कि “लड़के पक्ष ने इलाज कराया था।” इस बयान को लेकर अब निष्पक्ष जांच पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जांच से पहले ही यदि पुलिस अधिकारी इस तरह के बयान देंगे, तो पीड़ित को न्याय कैसे मिलेगा?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी पक्ष खुलेआम धमकी दे रहा है—“जो करना है कर लो।” इसके बावजूद पुलिस द्वारा कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
जानकारी के अनुसार आरोपी पक्ष ने अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जबकि दूसरी ओर पुलिस की धीमी कार्रवाई से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है।
परिजनों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पुलिस की संदिग्ध भूमिका को भी दर्शाता है।
मामले को लेकर अब सवाल उठ रहा है—क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या आरोपी इसी तरह बेखौफ घूमते रहेंगे?

