- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है
आगरा : हाल में आयोजित हुई उप्र उपनिरीक्षक पुलिस लिखित परीक्षा में पूछे सवाल में पंडित शब्द से शुरू हुआ विवाद थमा नहीं था कि अब नया मामला सामने आ गया है। परिषदीय विद्यालय में सोमवार से शुरू हुई वार्षिक परीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग पर सवाल उठा दिए हैं।
कक्षा सात की संस्कृत परीक्षा में प्रश्न एक के भाग पांच में पंडित शब्द से नया विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार को आयोजित परीक्षा के पेपर में पंडित शब्द के प्रयोग से विभाग के पदाधिकारियों के साथ वर्ग से जुड़े लोगों में आक्रोश फैल गया है। लोग इसे ब्राह्मण समाज और विद्वानों के अपमान के रूप में देख रहे हैं। मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, यह एक संवेदनशील मुद्दा है। हमने परीक्षा पेपर की जांच शुरू कर दी है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज रहे हैं। उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यूपी पुलिस की परीक्षा में भी आया था सवाल
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी पंडित शब्द से जुड़ा एक सवाल विवादा खड़ा किया है। उस परीक्षा में अवसरवादी के पर्याय के विकल्पों में पंडित शामिल था। जिस पर मंत्री समेत ब्राह्मण समाज ने आपत्ति जताई थी।
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक संघ का मानना है कि संस्कृत जैसे विषय में पंडित शब्द का प्रयोग बहुत सावधानी से होना चाहिए, क्योंकि यह ब्राह्मण वर्ग के साथ जुड़ा सम्मानजनक पद है। शिक्षा विभाग में पेपर सेटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसमें कोई जानबूझकर गलती हुई या लापरवाही बरती गई। संगठनों ने मांग की है कि दोषी पेपर सेटर पर कार्रवाई हो।
नहीं है सातवें पाठ का हिस्सा
संस्कृत के प्रश्न में जो प्रश्न पूछा गया वह प्रहेलिका पाठ में पहेली ही नहीं है। जिससे स्पष्ट होता है कि यह कार्य पेपर सेटर ने जानबूझकर किया है।इस तरह प्रश्न यदि शामिल किए जाते हैं तो वह पाठ का हिस्सा तो होते लेकिन यह पहेली ही पाठ का हिस्सा नहीं है।
प्रश्न
प्रहेलिका: पाठ के आधार पर वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है.
विकल्प दिए गए: बादल, पक्षी, वायु, पत्र
‘कक्षा सात की संस्कृत पाठयपुस्तक से सप्तम पाठ प्रश्न से लिया है। इस पाठ में सभी प्रहेलिकाएं (पहेलियां) हैं। जो बच्चों को संस्कृत के शब्दों और व्याकरण से परिचित कराने के लिए बनाई गई हैं। लेकिन प्रश्नपत्र में प्रश्न जो साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है के विकल्प के रूप में पंडित शब्द को पहेली के उत्तर के रूप में प्रश्नपत्र में जानबूझ जोड़कर भावनाओं को आहत किया गया है। ब्राह्मणों को जानबूझ कर अपमानित किया गया है। ऐसा कार्य करने वाले पेपर सेटर के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए। – बृजेश दीक्षित, प्रदेश संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा’
‘जिला स्तर पर एक कमेटी होती है, जिसमें डायट एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी होते हैं। जिन्हें पेपर बनाने और पेपर चेक करने की जिम्मेदारी होती है। पहेली जो पूछी गई वह पाठ का हिस्सा नहीं है, जिससे प्रतीत होता है यह जानबूझकर किया गया है। इस प्रश्न की ओर ध्यान न देकर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध कार्य किया है। इस मामले की गहनता से जांच होना अनिवार्य है। जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर हो। – धर्मेंद्र कसाना, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा’

