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सरहद लांघ गई नाव, पाकिस्तान की सलाखों में कैद ज़िंदगी, भारत आई चिट्ठी पढ़ते अपनों की आंखें हुईं नम

बांदा: यूपी के जनपद बांदा के तिंदवारी विकासखंड के कई गांवों के मछुआरे रोजी-रोटी की तलाश में गुजरात के समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं, लेकिन समुद्र की लहरें जब सरहद लांघ जाती हैं, तो उनकी किस्मत सलाखों के पीछे कैद हो जाती है। ऐसा ही दर्द तिंदवारी क्षेत्र के धौंसड़ गांव निवासी दो गरीब मछुआरे चांद बाबू और लक्ष्मण झेल रहे हैं, जो बीते पांच वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। अब इन मछुआरों का एक दर्द भरा पत्र गांव पहुंचा है, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है। पत्र पढ़ते ही परिजनों की आंखें भर आईं। आंखों में आंसू, दिल में उम्मीद और होठों पर सिर्फ एक ही फरियाद “हमें वतन वापस बुला लो।”

यह पत्र पाकिस्तान की जेल में बंद सर्वेश के भाई उमाशंकर के माध्यम से गांव तक पहुंचा। पत्र में चांद बाबू और लक्ष्मण ने लिखा है कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2023 में ही उन्हें बरी कर चुकी है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी सरकार भी उनकी रिहाई को तैयार है, लेकिन भारत सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आने के कारण वे आज भी जेल की यातनाएं झेलने को मजबूर हैं। सरकार की यही चुप्पी उनके परिवारों के लिए सबसे बड़ा दर्द बन गई है।

परिजन माजिद ने बताया कि बीते कई वर्षों से वे नेताओं और अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं। जिलाधिकारी से लेकर मंत्रालय तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिला। किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर उनके बच्चों की वतन वापसी में देरी क्यों हो रही है। न उनके पास पैसा है, न पहुंच है। बस एक उम्मीद है कि सरकार कभी तो उनकी पीड़ा सुनेगी।

पत्र में चांद बाबू और लक्ष्मण ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महा सचिव विशंभर प्रसाद निषाद से भी अपील की है कि वे सांसदों और सरकार के माध्यम से उनकी सुरक्षित वतन वापसी का रास्ता निकालें। परिजन अब भारत सरकार और राहुल गांधी से भी मदद की गुहार लगा रहे हैं। ग्राम प्रधान रामप्रकाश ने बताया कि पंचायत स्तर से भी इस संबंध में पत्राचार किया गया है।

बताया जाता है कि तिंदवारी थाना क्षेत्र के जसईपुर, धौंसड़ समेत आसपास के कई गांवों के मछुआरे हर साल ठेके पर मछली पकड़ने गुजरात के पोरबंदर जाते हैं। समुद्र में तेज हवाओं और बहाव के चलते नाव जब अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में पहुंच जाती है, तो वहां के सैनिक मछुआरों को गिरफ्तार कर जेल में डाल देते हैं। यह सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है। कई मछुआरे जेल से लौट भी आते हैं, लेकिन रोजगार के अभाव में मजबूरन फिर समुद्र का रुख करते हैं।

इस समय तिंदवारी क्षेत्र के धौंसड़ गांव निवासी चांद बाबू (26) पुत्र बशीर, लक्ष्मण (22) पुत्र जागेश्वर, जसईपुर गांव के जितेंद्र (28) पुत्र संजय और दरदा गांव निवासी सर्वेश (32) पुत्र उमाशंकर पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी ने बताया कि जिले के मछुआरों के पाकिस्तान की जेल में बंद होने की जानकारी शासन को भेज दी गई है। जैसे ही कोई निर्देश प्राप्त होगा, आगे की कार्रवाई कर परिजनों को सूचित किया जाएगा।

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