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आखिर क्या है सच? मुख्तार की मौत के बाद बंदियों में खौफ, सब्जी-दाल से परहेज, टमाटर व नमक से खा रहे रोटी

बाँदा : मुख्तार की मौत व वरिष्ठ जेल अधीक्षक को जान से मारने की धमकी के बाद बांदा जेल हाई अलर्ट पर है। जेल में अफसरों व पुलिस की आवाजाही से बंदी खौफ में है। सुबह-शाम जेल में पुलिस का फ्लैग मार्च व सख्ती से बंदी परेशान हैं।

पेशी पर अदालत आए बंदियों ने बताया कि जेल में सुबह शाम पुलिस का फ्लैग मार्च हो रहा है। बंदियों को बैरिक से कहीं जाने नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि एक बंदी को दूसरे बंदी से बात करने की भी इजाजत नहीं है। दिन भर अधिकारियों व पुलिस की आवाजाही से बंदियों में खौफ है।

एक बंदी ने कहा कि मुख्तार को जेल में खाने में जहर देने के आरोप से कई बड़े बंदी खाना खाने से परहेज कर रहे हैं। कच्चे टमाटर में नमक डालकर रोटियां खा रहे हैं। यहां तक की खौफ के कारण तमाम बंदी न हंसते हैं और न ही टीवी आदि देख रहे है।

अखबार पढ़ने भी नहीं जाते हैं। जेल में एकाएक ऐसी शांति छा गई है मानों कोई है ही नहीं। उधर, वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज का कहना है कि जेल में सब कुछ सामान्य है। खौफ जैसा कुछ भी नहीं है।

मुख्तार अंसारी की मौत का आखिर क्या है सच ?

करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डिया अरेस्ट) से मौत हो गई। मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां नौ डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब साढ़े दस प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना सार्वजनिक की। तब तक मुख्तार के परिवार का कोई सदस्य मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा था।
गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और करीब साढ़े आठ बजे के आसपास उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां दो घंटे तक उसका इलाज चला। उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां रात साढ़े दस बजे के आसपास उसकी मौत हो गई। परिवार ने जहर देने का आरोप लगाया है।

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