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राष्ट्रपति संत प्रेमानंद से मिलीं, हाथ जोड़कर प्रणाम किया:संत ने राधे-राधे कहा; परिवार के साथ मुर्मू वृंदावन आश्रम पहुंचीं

मथुरा : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। उन्होंने 25 मिनट तक आध्यात्मिक चर्चा की। राष्ट्रपति शुक्रवार सुबह 7 बजे बारिश के बीच परिवार के साथ प्रेमानंदजी के वृंदावन आश्रम पहुंचीं। राष्ट्रपति ने संत को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

प्रेमानंद जी ने राधे-राधे कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। आश्रम में राष्ट्रपति का संतों ने माला-चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया। राष्ट्रपति ने प्रेमानंदजी को जन्मदिन की बधाई दी। प्रेमानंदजी का गुरुवार यानी 19 मार्च को 56वां जन्मदिन था।

राष्ट्रपति यूपी के 3 दिन के दौरे पर हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। इसके बाद शाम को मथुरा पहुंचीं। आज प्रेमानंदजी से मुलाकात के बाद बाबा नीब करौरी महाराज के आश्रम पहुंचेंगी। वहां से रामकृष्ण मिशन हॉस्पिटल जाएंगी और पश्चिमी यूपी की सबसे आधुनिक कैंसर यूनिट का उद्घाटन करेंगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह मथुरा का दूसरा दौरा है। इससे पहले वह पिछले साल 25 सितंबर को आई थीं। तब बांके बिहारी के दर्शन किए थे।

राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। प्रेमानंद जी ने राधे-राधे कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। प्रेमानंद जी ने राधे-राधे कहकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और दोनों नातिनें आद्याश्री और नित्याश्री भी थीं।

राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और दोनों नातिनें आद्याश्री और नित्याश्री भी थीं।

आश्रम ने संतों ने राष्ट्रपति को माला और चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया।

आश्रम ने संतों ने राष्ट्रपति को माला और चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया।

राष्ट्रपति आध्यात्मिक चर्चा के दौरान भाव-विभोर नजर आईं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और दोनों नातिनें आद्याश्री और नित्याश्री मौजूद थीं। केलीकुंज आश्रम में राष्ट्रपति और उनके परिवार के लिए कुर्सियां लगाई गई थीं।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति संत प्रेमानंद महाराज के साथ आध्यात्मिक चर्चा के दौरान भाव-विभोर दिखीं। इस दौरान कुटिया में सिर्फ राष्ट्रपति, उनके परिजन और बाबा के करीबी शिष्य ही मौजूद रहे।

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