दैनिक उजाला, मथुरा/ बलदेव : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आगामी 6 व 7 सितंबर को आयोजित की जा रही पीईटी परीक्षा को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। कारण यह है कि अधिकांश अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। मथुरा जनपद के कई परीक्षार्थियों का सेंटर हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद जैसे जिलों में बना दिया गया है, जबकि समीपवर्ती जिलों आगरा, अलीगढ़, हाथरस आदि में भी केंद्र बनाए जा सकते थे।
मथुरा के परीक्षार्थी योगेश ने बताया कि उसे हापुड़ परीक्षा केंद्र मिला है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। योगेश ने कहा कि “सरकार को छात्रों की सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन इस बार परीक्षा व्यवस्था ने युवाओं को हताश और नाराज कर दिया है। हजारों रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे, जो गरीब परिवारों के लिए भारी बोझ है।”
भाकियू चढूंनी के मंडल अध्यक्ष रामवीर सिंह तोमर ने कहा कि युवाओं को रोजगार देना तो सरकार के एजेंडे में नहीं दिख रहा, बल्कि उल्टे उन्हें दूर-दराज के जिलों में परीक्षा भेजकर आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार को परीक्षार्थियों के लिए नजदीकी जिलों में परीक्षा केंद्र बनाना चाहिए। साथ ही आने-जाने के लिए रोडवेज व रेल यात्रा में निःशुल्क सुविधा दी जानी चाहिए, ताकि युवाओं को कुछ राहत मिल सके।
इस मामले पर किसान कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष ठा. नरेश पाल सिंह ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा, *“प्रदेश की भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा केंद्र दूर बनाकर उन्हें आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव दिया जा रहा है। सरकार को तुरंत निर्णय लेकर समीपवर्ती जिलों में परीक्षा केंद्र सुनिश्चित करने चाहिए, अन्यथा युवाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखना तय है।”
युवाओं और अभिभावकों की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है। यदि सरकार ने समय रहते इस पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आगामी दिनों में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

