Breaking
Sat. Feb 28th, 2026

शंकराचार्य बोले- सच सामने आए, चाहे नार्कों टेस्ट हो:फैसला पक्ष में नहीं आया तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, झूठ की कलई खुल रही

प्रयागराज : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच सुनवाई करेगी।

दरअसल, तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जज (रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूंसी थाने की पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बटुकों से कुकर्म की FIR दर्ज की थी।

सुनवाई से पहले शंकराचार्य ने कहा- हमारी ओर से कोर्ट में वकील मजबूती से पक्ष रखेंगे। सच को सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट सहित जो भी हो, वो होना चाहिए। झूठ की उम्र लंबी नहीं होती। सभी प्रमाण पेश किए जाएंगे। फैसला पक्ष में न आने पर उच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख करेंगे।

इससे पहले, शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी अजीत कुमार सरोज को पुलिस ने करीब 20 घंटे बाद जंसा थाना क्षेत्र के रेसीपुर से पकड़ा। आरोपी लॉ का छात्र है। वाराणसी कचहरी में ही प्रैक्टिस करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया- पड़ोसी को फंसाने के लिए यह मैसेज भेजा था।

बता दें कि श्रीनाथ त्रिपाठी को बुधवार देर रात जान से मारने की धमकी मिली थी। उनके मोबाइल पर आए मैसेज में लिखा था- वाराणसी की कचहरी को बम से उड़ा देंगे, तुम्हें भी।

गुरुवार दोपहर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने एक मुस्लिम शख्स पहुंचा। उसने कहा- शंकराचार्य पर आरोप लगाना बेवकूफी है।

गुरुवार दोपहर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने एक मुस्लिम शख्स पहुंचा। उसने कहा- शंकराचार्य पर आरोप लगाना बेवकूफी है।

मामला

  • प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे।
  • पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई।
  • FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
  • 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आ गई। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया। ‘आज तक’ को दिए इंटरव्यू में दावा किया- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया।

राजा भैया की बेटी राघवी शंकराचार्य के समर्थन में आईं

बाहुबली नेता और कुंडा विधायक राजा भैया की बेटी राघवी कुमारी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में आ गई हैं। उन्होंने विवाद को सनातन परंपरा को कमजोर करने की साजिश बताया। राघवी ने X पर लिखा- शंकराचार्य का पद किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं होता। यह चार वेदों की जीवित परंपरा का सबसे उच्च आध्यात्मिक स्थान है।

‘बच्चों को साथ में रखकर बयान के लिए तैयार किया जा रहा’

  • शंकराचार्य ने कहा- वे बच्चे तो उन्हीं (आशुतोष महाराज) के साथ रह रहे हैं। पुलिस ने भी कभी नहीं कहा कि बच्चों को जुवेनाइल बोर्ड में भेजो। बच्चों के माता पिता ने भी नहीं कहा कि हमारे साथ बच्चा रहे। बच्चा उन्हीं के साथ क्यों है? हरदोई के किसी होटल में बच्चों को रखा गया है। पत्रकार भी बाहर खड़े थे। उनसे भी नहीं मिलने दिया गया। क्यों बच्चे उसी के कब्जे में है?
  • एक ऐसा व्यक्ति जो हिस्ट्रीशीटर है, उसके साथ नाबालिग बच्चे महीनों से हैं, आखिर क्यों? आखिर क्यों उत्तर प्रदेश की पुलिस उसको यह मौका दे रही है? आखिर इसके पीछे क्या उद्देश्य है? इसी से समझ में आता है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस उसको संरक्षण दे रही है। बच्चों को उसके साथ रख कर बयान आदि के लिए तैयार कर रही है। इसके लिए आप व्यवस्था कितनी भी बनावटी बनाएं, जो सच है वो सच ही रहने वाला है।

शंकराचार्य बोले- इतने दिनों के बाद की मेडिकल रिपोर्ट के मायने नहीं

शंकराचार्य ने कहा- इतने दिनों के बाद की मेडिकल रिपोर्ट के कोई मायने नहीं होते। मान लो कि उस बच्चे के साथ ऐसा कृत कभी हुआ हो तो वह निकल कर आ सकता है, लेकिन ऐसा कृत किसने किया? इसके लिए तो अभी बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। क्योंकि, जो बच्चा हमारे पास कभी आया ही नहीं, उसके साथ हमारे नाम को जोड़ना, हमें दोषी ठहराना इतना सरल नहीं है।

शंकराचार्य बोले- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी

शीशमहल पर शंकराचार्य ने कहा- यह जो कांच है, इसे देखकर कुछ लोग कहते हैं कि यह अच्छा है, पारदर्शिता है और छिपकर कुछ नहीं हो सकता। दरबार में खड़ा व्यक्ति भी देख सकता है कि अंदर क्या हो रहा है। अब यह नजरिए का अंतर है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *