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बड़ी खबर, ईरान को रूस से मिली ऐसी जानकारी, जिससे अमेरिकी सेना पर हमला करने में मिल सकती है मदद

  • एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान को रूस से ऐसी जानकारी मिली है, जिससे अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिल सकती है, रूस और ईरान के बीच मित्रवत संबंध रहे हैं

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो गया है। इस बीच ईरान को रूस से ऐसी जानकारी मिली है, जिससे ईरान को अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिलेगी। ये जानकारी एपी ने सूत्रों के हवाले से दी है।

दरअसल अमेरिकी खुफिया जानकारी रखने वाले दो अधिकारियों के अनुसार, रूस ने ईरान को ऐसी जानकारी दी है, जिससे तेहरान को क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य संपत्तियों पर हमला करने में मदद मिल सकती है। हालांकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ये साफ नहीं किया है कि क्या रूस, ईरान को इस बारे में निर्देश दे रहा है? या इस जानकारी का आगे क्या किया जाएगा?

रूस के ईरान से हैं दोस्ताना संबंध 

बता दें कि रूस एक ऐसा देश है, जिसके ईरान से संबंध काफी दोस्ताना हैं। ऐसे में ये संकेत मिल रहे हैं कि रूस ने भी अप्रत्यक्ष रूप से उस संघर्ष में कूदने की कोशिश की है, जो फिलहाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा है। इस संघर्ष की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मचा हुआ है। 

बता दें कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज़्बुल्लाह, हमास और हौथी जैसे प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देने के कारण वर्षों से अलगाव का सामना करना पड़ा है।

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

हालांकि रूस को लेकर व्हाइट हाउस ने अपना पक्ष साफ किया है और उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि रूस इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के बारे में ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने शुक्रवार को कहा कि ईरान में सैन्य अभियानों के संबंध में इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है क्योंकि हम उन्हें पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं।

हालांकि लेविट ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या ट्रंप ने कथित खुफिया जानकारी साझा करने के बारे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी या क्या उनका मानना ​​​​है कि रूस को इसके परिणाम भुगतने चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ जब क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव से पूछा गया कि क्या रूस राजनीतिक समर्थन से आगे बढ़कर ईरान को सैन्य सहायता भी देगा? इस पर उन्होंने कहा कि तेहरान की ओर से अभी ऐसी कोई मांग नहीं की गई है।

उन्होंने शुक्रवार को कहा, “हम ईरानी पक्ष और ईरानी नेतृत्व के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और निश्चित रूप से यह बातचीत जारी रखेंगे।”

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