Breaking
Sat. Feb 14th, 2026

लक्षद्वीप पर कब्जा करने वाला था पाकिस्तान, सरदार पटेल ने पलट दी थी बाजी, यहां पढ़िए पूरी कहानी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूबसूरत लक्षद्वीप की यात्रा के बाद यह पूरी दुनिया की नजर में आ गया है। लेकिन भारत के पश्चिमी तट से करीब 300 किलामीटर दूर यह द्वीप भारत के हिस्से में कैसे आया? क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान ने लक्षद्वीप पर कब्जा करने की कोशिश की थी? लक्षद्वीप भारत के कब्जे में कैसे आया, इसकी पूरी कहानी यहां पढ़िए।

बात 1947 की है। भारत पाकिस्तान बंटवारा हो चुका था। दोनों देश रियासतों को अपने में ज्यादा से ज्यादा विलय कराकर देश को विस्तार देने में लगे हुए थे। भारत की तरफ से रियासतों के विलय की जिम्मेंदारी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल संभाल रहे थे। वह बहुत तेजी से मुख्यभूमि की रियासतों को भारत में विलय कराने के लगे हुए थे। उन्होंने भारत में साढ़े 500 रियासतों को मिला भी लिया।

इसी दौरान दूरदर्शी सरदार पटेल को लक्षद्वीप कब्जाने को लेकर पाकिस्तानी साजिश की भनक लगी। फिर क्या था उन्होंने दक्षिणी रियासत के मुदालियर भाइयों से कहा कि वह अपनी सेना लेकर बहुत तेजी से लक्षद्वीप जाएं और वहां तिरंगा फहरा दें। सरदार के निर्देश पर रामास्वामी और लक्ष्मणस्वामी मुदालियर ने तुरंत लक्षद्वीप पर पहुंचे और वहां तिरंगा लहरा दिया।

भारत के लक्षद्वीप पहुंचने के चंद घंटों बाद पाकिस्तानी युद्धपोत भी आ धमके लेकिन तब तक द्वीप भारत का हिस्सा हो चुका था। पाकिस्तानी भारतीय ध्वज को लहराता देख मनमसोस कर वापस चले गए। लक्काद्वीप, मिनिकॉय और अमीनदीवी द्वीपसमूह सहित लक्षद्वीप के 36 द्वीप भारत का हिस्सा बन गए।

1947 में भारत में शामिल करने के बाद 1956 में इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। 1971 में इन सभी द्वीपों को मिलाकर इसका नाम लक्षद्वीप रखा गया। अब यह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

देश की सुरक्षा में लक्षद्वीप की बेहद अहम भूमिका है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां से दूर-दूर तक के जहाजों पर नजर रखी जा सकती है। समुद्र में चीन के बढ़ते दखल के बाद भारत लक्षद्वीप में मजबूत सैन्यअडडा तैयार कर रहा है ताकि समुद्र में हो रही गतिविधि पर नजर रखी जा सके। समुद्री व्यापार और व्यवसाय के लिहाज से भी ये द्वीप समूह भारत के लिए बहुत जरूरी है।

लक्षद्वीप भले ही भारत का अभिन्न अंग है लेकिन अगर आप राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा या भारत के किसी अन्य राज्य रहने वाले हैं तो आपको एक अनुमति पत्र लेना होगा। इसके बाद ही आप लक्षद्वीप जा पाएंगे। केंद्र सरकार ने लक्षद्वीप की सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी समूहों की विरासत को बचाए रखने के लिए किया है। यहां ज्यादातर आबादी मुस्लिम है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *