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Sat. Feb 14th, 2026

PMLA का मतलब प्रधानमंत्री की लाल आंख, ED की कार्यशैली पर फूटा कपिल सिब्बल का गुस्सा

  • विपक्षी नेताओं को बिना सबूत के गिरफ्तार कर रही एजेंसी: कपिल सिब्बल
  • मौखिक शिकायत पर लोगों को गिरफ्तार कर रही ईडी: कपिल सिब्बल

नई दिल्ली : राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) पर टिप्पणी करते हुए ईडी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता ने कहा,”पीएमएलए का फुल फॉर्म ‘प्रधानमंत्री की लाल आंख है और इसका मनी लॉन्ड्रिंग से कोई लेना-देना नहीं है।”

कपिल सिब्बल ने समचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “पीएमएलए प्रधानमंत्री की लाल आंख है। इसका मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम से कोई लेना-देना नहीं है। इसका मतलब है कि ईडी जो करना चाहती है वो कर सकती है।”

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि ईडी किसी भी मौखिक बयान के आधार पर किसी भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि अगर किसी को गिरफ्तार करवाना चाहते हैं तो किसी दूसरे व्यक्ति को ईडी से पास भेजकर उसके खिलाफ मौखिक तौर पर शिकायत दर्ज करवा दीजिए। मौखिक शिकायत के तौर पर ईडी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेती है। फिर कोर्ट में मामला अटका रहता है।

कपिल सिब्बल ने आगे कहा,”पीएमएलए के तहत किसी को गिरफ्तार करने का दूसरा तरीका यह है कि कहीं भी जमीन का टुकड़ा ढूंढा जाए, किसी के खिलाफ किसी का मौखिक बयान लिया जाए और फिर उस बयान के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया जाए, जिसका खुलासा आरोपी को भी नहीं किया जाता है।”

विपक्षी नेताओं को बिना सबूत के गिरफ्तार कर रही एजेंसी: कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने ईडी के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए कहा,”यह सरकार की एक मजबूत शाखा है। इसका कानून प्रवर्तन से कोई लेना-देना नहीं है। (अरविंद) केजरीवाल, या (मनीष) सिसौदिया या (सत्येंद्र) जैन के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। कोई पैसे का लेन-देन नहीं है। कोई नहीं कहता कि कितना पैसा किसे दिया जाता है, कोई बैंक खाता या कुछ भी नहीं है, बस लोगों के मौखिक बयान पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

जब उनसे पूछा गया कि पीएमएलए के तहत गिरफ्तार लोगों को अदालतें आसानी से जमानत क्यों नहीं देती हैं, इस पर सिब्बल ने कहा, “अदालतों से पूछिए। मैं पूछता रहता हूं। मुझे कोई जवाब नहीं मिलता।”

बता दें कि विपक्ष अक्सर अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करता रहा है।

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