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5 रुपये के भारतीय बिस्कुट के लिए गाजा में मारामारी, 2400 में बिक रहा, बेटे की इच्छा पूरी कर बाप ने मर्मस्पर्शी शेयर किया Video

  • गाजा में लगातार युद्ध जारी रहने के चलते लोग दाने-दाने को लेकर मोहताज हो रहे हैं

दैनिक उजाला, डेस्क : सिर्फ एक बिस्कुट नहीं है, बल्कि एक नॉस्टेलजिया है। भारत के घर-घर में पाई जाने वाली 5 रुपए वाली पारले जी बिस्कुट की एक पैकेट की कीमत गाजा (फिलिस्तीन) में आसमान छू रही है। गाजा (Gaza) में खाद्य संकट (Food Crisis) के कारण पारले जी की कीमत 24 यूरो (लगभग 2400) रुपए पहुंच गई है। यह जानकारी गाजा में रहने वाले एक व्यक्ति ने साझा की है।

5 रुपए वाली बिस्कुट 2400 रुपए की कीमत पर

मोहम्मद जावेद नाम के शख्स ने ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुझे राफिफ के लिए उसका पसंदीदा बिस्कुट मिल गया। इसकी कीमत 1.5 यूरो से बढ़कर 24 यूरो पहुंच गई, लेकिन मैं राफिफ को उसका पसंदीदा बिस्कुट देने से मना नहीं कर सका।

‘क्या हम फिलिस्तीनियों को पारले-जी बिस्कुट भेज सकते हैं’

मोहम्मद जावेद का वीडियो वायरल (Gaza Video Viral) होने के बाद भारतीय लोगों ने पारले कंपनी और भारत सरकार (Indian Government) से अपील की है। एक यूजर ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर को लिखा कि वह बच्चा भारत का पसंदीदा बिस्कुट खा रहा है। मैं जानता हूं कि भारत हमास-इजयराल युद्ध में तटस्थ है, लेकिन क्या हम फिलिस्तीनी नागरिकों को और पारले जी भेज सकते हैं? ये ग्लूकोज बिस्किट हैं। इससे नागरिक आबादी को राहत मिलेगी।

गाजा में कालाबाजारी से खाद्यान कीमतें आसमान छू रहीं

कालाबाजारी के कारण गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों को खाद्यान संकट का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि दूसरे देशों से गाजा में खाद्य पदार्थ मुख्य रूप से मानवीय सहायता के रूप में भेजे जाते हैं। यह आमतौर पर मुफ्त होते हैं, लेकिन गाजा में रहने वाले कुछ लोग तक ही ये सामान पहुंच पाते हैं। जिसके कारण कालाबाजारी बढ़ती है।

1 किलो प्याज 4423 रुपए में बिक रहा

एक रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में एक किलो चीनी की कीमत 4914 रुपए, 1 किलो खाद्य तेल की कीमत 4177 रुपए, 1 किलो प्याज की कीमत 4423 रुपए, 1 कप कॉफी कीमत 1800 रुपए, 1 किलो आलू की कीमत 1965 रुपए है।

1938 में लॉन्च हुआ था पारले जी बिस्कुट

1938 में पारले जी बिस्कुट ल़ॉन्च हुआ था। उस समय स्वदेशी आंदोलन के दौरान ब्रिटिश स्नैक्स के दौरान स्वदेशी विकल्प के रूप में उभरा। दशकों से, पारले-जी ने ‘श्रिंकफ़्लेशन’ इकॉनोमी पॉलिसी को अपनाते हुए अपनी कम कीमत को बनाए रखने में कामयाबी हासिल की है। पारले जी ने बिस्कुट का वजन कम किया, लेकिन दाम में कोई बढ़तोरी नहीं की। 5 रुपये का पैकेट जिसमें कभी 100 ग्राम होता था, अब उसमें लगभग 55 ग्राम होता है। साल 2013 में पारले जी 5000 करोड़ रुपये की बिक्री पार करने वाला पहला FMCG ब्रांड बन गया। नीलसन की रिपोर्ट के अनुसार 2011 तक यह मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे ज़्यादा बिकने वाला बिस्कुट था।

वित्त वर्ष 2024-25 में बिस्कुट के मुनाफे में दोगुनी वृद्धि

पारले बिस्कुट ने वित्त वर्ष 2024-25 में मुनाफे में दोगुनी वृद्धि दर्ज की। कंपनी का मुनाफा 1606.95 करोड़ रुपये हुआ। राजस्व प्रतिशत बढ़कर 14,349.4 करोड़ रुपये हो गया, वित्त वर्ष 24 में कुल राजस्व 5.31 प्रतिशत बढ़कर 15,085.76 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने बिस्कुट के प्रचार में करीब 442 करोड़ रुपए खर्च किए।

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