गोरखपुर : मैं सिर्फ मेडिकल स्टोर चलाता हूं, फिर भी मुझे लोग ‘डॉक्टर’ कहकर बुलाते हैं। मैं इस झूठ काे स्वीकार नहीं कर पाता था, इसलिए दीपक को डॉक्टर बनाने की जिद ठान ली थी। मगर पशु तस्करों ने मेरे बेटे को ही मार डाला।
यह कहते हुए दीपक के पिता दुर्गेश गुप्ता जमीन पर बैठकर रोने लगते हैं। परिवार के लोग उन्हें संभालते हैं। वह थोड़ा संभलकर कहते हैं- दीपक बहुत अच्छा क्रिकेट खेलता था। मगर NEET की तैयारी के लिए अपनी प्रैक्टिस भी छोड़ देता था। मैं दीपक के डॉक्टर बनने का इंतजार कर रहा था, मगर अब जिंदगीभर जवान बेटे की मौत का दर्द लेकर जीना है।
गोरखपुर में अकेले दुर्गेश अपने बेटे की मौत से दुखी नहीं हैं, बल्कि गांव के 2 हजार से ज्यादा लोग गुस्से में हैं। पुलिस को देखकर ही पत्थर फेंकने लगते हैं। महिलाएं PAC जवानों को हाथ से मारने लगती हैं, जवान गुस्से में देखते हैं, मगर महिलाएं उन्हें गालियां देने लगती हैं।
गांव में 15 सितंबर की रात 10.30 बजे से शुरू हुआ बवाल अगले दिन शाम 4 बजे तक जारी रहा। गुस्साए गांव के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। गाड़ियों को आग लगा दी। सड़क जाम कर दी गई। गांव के लोगों का कहना है कि पहले वो सिर्फ गोवंश ले जाते थे, अब क्या हमारे बच्चे भी उठा ले जाएंगे?
इसकी वजह ये रही कि इस गांव में पहली बार पशु तस्करों ने किसी लड़के को मार डाला था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर कहते हैं-

दीपक के शरीर पर मारपीट के दौरान लगी चोटें मिली हैं। मगर उसकी मौत सिर पर किसी भारी चीज के वार से हुई है। उसके सिर पर गहरी चोट लगी थी। खून ज्यादा बह चुका था।
SSP राज करन नय्यर ने जंगल धूषण चौकी इंचार्ज ज्योति नारायण तिवारी समेत पूरे स्टाफ को सस्पेंड कर दिया। इनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी है। जांच के लिए स्पेशल टीम बना दी गई है। गोरखपुर पुलिस को गांव का एक CCTV भी मिला है। 1.30 मिनट की फुटेज में 2 तरह के सीन दिखते हैं-

फुटेज गांव के बाहर की तरफ की है। इसमें 4-5 गोवंश भागते हुए दिखते हैं।

इस फुटेज में एक पिकअप गोवंश का पीछा करते हुए पहुंचती है। इसके ऊपर एक कुत्ता भी बैठा था। इसमें 5-6 लोग दिखते हैं।
पशु तस्कर बिहार का रहने वाला, अपने साथियों के नाम बताए
पिपराइच क्षेत्र के गांव महुआचापी में पशुओं की चोरी के मकसद से आए 12 तस्करों को अंदाजा नहीं था कि उन्हें गांव के लोग ही घेर लेंगे। विरोध करने वालों में सबसे आगे खड़े दीपक को उन्होंने पिकअप गाड़ी में खींच लिया। भाग रहे बदमाशों के एक साथी को गांव के लोग पकड़ भी लेते हैं। उसको इतना पीटा कि वो इस वक्त मेडिकल कॉलेज में एडमिट है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने उसको गांव के लोगों से छुड़ाया।
पूछताछ में उसने कहा- मैं बिहार के गोपालगंज का रहने वाला हूं। मेरा नाम अजब हुसैन है। गांव के लोगों ने बताया- हम एक पशु तस्कर को पकड़कर लाए, वो अपने साथियों के नाम-पते बता रहा था, उस वक्त पर पुलिस दीपक को नहीं ढूंढ रही थी। उस तस्कर को छुड़ाने के लिए हमसे भिड़ी हुई थी। अगर उस वक्त बदमाशों की घेराबंदी हो जाती, तो वो पकड़े भी जाते और दीपक की जान भी बच जाती। हकीकत यही है कि पुलिस लापरवाही में ये जान गई है।
गांव के लोगों में बच्चे की मौत का दुख, पुलिस के लिए गुस्सा
दीपक का दाह संस्कार पुलिस सिक्योरिटी में किया जा चुका है। गांव की सड़कों पर अब बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ था। लोग अपने घरों के अंदर थे। सिर्फ दीपक के घर के बाहर लोगों की भीड़ थी। सिर झुकाए बैठे लोग दूर से दिख रहे थे। उनके चेहरों पर दुख के साथ पुलिस के लिए गुस्सा था।
वो लोग आपस में चर्चा कर रहे थे- कितनी भी पुलिस, PAC लगा लें। अगर पशु तस्कर पकड़े नहीं गए, तो फिर बवाल तय है। उनके एनकाउंटर ही होने चाहिए। गांव के एक व्यक्ति गुस्से में कहते हैं- पहले ये लोग सिर्फ गोवंश को उठाकर ले जाते थे, काट डालते थे। अब क्या हमारे बच्चों को भी नहीं छोड़ेंगे? हमने बातचीत के लिए कैमरा निकाला, मगर गांव के लोगों ने ऑन कैमरा बातचीत करने से मना कर दिया।

पिता दुर्गेश ने अपने बेटे दीपक की चिता को मुखाग्नि दी। वह चिता के पास बैठकर बहुत देर तक रोते रहे।
मां बोलीं- वो कहता तुम्हें पूरा देश घुमाऊंगा
अब हम दीपक के घर के अंदर पहुंचे। यहां दीपक का छोटा भाई प्रिंस अपनी मां सीमा को संभाल रहा था। वो लगातार रोए जा रही थीं। प्रिंस नवोदय विद्यालय में 9वीं का स्टूडेंट है। मां कहती हैं- उसको 9 महीने कोख में रखा, फिर 18 साल तक पाल पोसकर बड़ा किया। वो अपने क्रिकेट किट और किताबें संभालकर रखता था। मेरा बहुत ख्याल रखता था।
वो कहता- एक बार डॉक्टर बन जाऊं, फिर तुम्हें अपने साथ घुमाने ले जाऊंगा। छोटे भाई को भी पढ़ाऊंगा। यह सुनकर मां की गोद में सिर रखकर प्रिंस भी रोने लगा। घर में दीपक के चाचा वीरेंद्र का परिवार भी साथ रहता है।

दादा बोले- मेरी आंखों के सामने पोते को उठा ले गए
दीपक के बाबा खरबार गुप्ता और दादी अमरावती देवी की तबीयत खराब चल रही है। दादी कहती हैं- रात में मेरे ही पास दीपक सोया था। अचानक कोई फोन आया। थोड़े देर में आने के लिए कहकर निकला। इसके बाद उनके जुबान से आवाज नहीं निकल पाई। वह रोने लगी। बाबा की आंखों के सामने ही पशु तस्कर दीपक को उठा ले गए। उन्हें सुबह पता चला कि दीपक अब इस दुनिया में नहीं है।

