नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। यह याचिका दोषी ठहराए जाने के बाद निर्वाचित विधायी निकायों के प्रतिनिधियों को स्वत: अयोग्य ठहराने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। इस याचिका में जनप्रतिनिधियों के अधिनियम की धारा 8(3) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में सूरत की कोर्ट ने दोषी करार दिया। और 2 साल की सजा सुनाई है। इस सजा के साथ ही जन प्रतिनिधित्व कानून की वजह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई। सुप्रीम कोर्ट में जन प्रतिनिधित्व कानून के सेक्शन 8 (3) की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए एक पीआईएल दायर की गई है। इस पीआईएल में मांग की गई है कि, इस सेक्शन को रद्द किया जाए। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि, धारा 8(3) के तहत प्रतिनिधियों को दोषी पाए जाने के बाद उन्हें अपने आप अयोग्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
पीआईएल में कहा गया कि, चुने हुए प्रतिनिधि को सजा का एलान होते ही उनका जन प्रतिनिधित्व यानी सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाना असंवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पीआईएल में कहा गया है कि, अधिनियम के चेप्टर-III के तहत अयोग्यता पर विचार करते समय आरोपी के नेचर, गंभीरता, भूमिका जैसे कारकों की जांच की जानी चाहिए।

