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Thu. Feb 12th, 2026

VIT यूनिवर्सिटी को नोटिस: परिसर को किले की तरह बनाने-स्वयं के कानून चलाने का आरोप, जानें और क्या-क्या पता लगा

  • मध्य प्रदेश के सिहोर में स्थित VIT यूनिवर्सिटी को उच्च शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किया है

सिहोर : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) यूनिवर्सिटी में बीते 25 नवंबर को आगजनी-तोड़फोड़ मामले मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने गंभीर अनियमितताओं के धारा 41 (1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में लिखा विश्वविद्यालय में लगभग 15000 विद्यार्थी है  और छात्रावासों में मेस की सेवाएं असंतोषजनक हैं।  भोजन, जलपान की गुणवत्ता पर ज्यादा छात्रावासियों की प्रतिक्रिया नकारात्मक है। छात्राओं द्वारा पेयजल में दुर्गंध आने की बात समिति को बताई गई। 

नोटिस के मुताबिक स्वेच्छाचारिता एवं मनमानी प्रबंधन द्वारा परिसर को एक किले की तरह रखा गया है। परिसर की चारदीवारी के भीतर प्रबंधन के स्वयं के कानून चलते हैं।  तानाशाही रवैया अपनाया जाता है। अनुशासन के नाम पर आई-कार्ड जब्त करना, परीक्षा में शामिल नहीं होने देना, प्रायोगिक परीक्षाओं में कम अंक देना या फेल कर देने की धमकी भी दी जाती है। भोजन व्यवस्था की शिकायत पर सुनवाई नहीं होती तथा कह दिया जाता है कि जो बना है, वही खाना पड़ेगा।

प्रशासन बीमारी फैलने की जानकारी छुपा रहा था

नोटिस में लिखा है स्वास्थ्य एवं चिकित्सा केन्द्र विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में कितने विद्यार्थियों को पीलिया की बीमारी हुई इसका कोई सटीक रिकार्ड नहीं था। बीमारी फैलने की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन इसे छुपा रहा था और लीपा-पोती के प्रयास किए जा रहे थे। किसी तरह के प्रीवेंटिव स्टेप्स या कंट्रोल के प्रयास नहीं किए गए। केन्द्र में सुविधाएं अपर्याप्त पाई गई तथा क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के अनुसार इसका पंजीयन भी नहीं पाया गया। मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का नितांत अभाव है। पेयजल एवं अन्य जल संसाधनों का नियमित माइक्रोबॉयोलॉजिकल ऑडिट का भी पालन नहीं किया जा रहा है।

कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव

नोटिस में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का अभाव है। अनेक अवसरों पर विद्यार्थियों/पालकों को लिखित में सूचित नहीं किया जाता। स्पष्टता के अभाव में वि‌द्यार्थी भटकते रहते हैं। समिति को 02 वि‌द्यार्थी मिले, जो परिचय पत्र के लिए परेशान हो रहे थे तथा प्रबंधन उन्हें स्पष्ट नहीं कर रहा था कि परिचय पत्र कब मिलेंगे और कौन प्रदान करेगा।

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