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Sat. Feb 14th, 2026

अरुणाचल में ट्रक खाई में गिरा, 21 की मौत:जिंदा बचा एक मजदूर 2 दिनों तक पैदल चलकर आर्मी कैंप पहुंचा, तब हादसे की जानकारी मिली

अरुणाचल प्रदेश : अरुणाचल प्रदेश के अनजॉ जिले के हयुलियांग इलाके में एक ट्रक 1000 फीट गहरी खाई में गिर गया। इस हादसे में ड्राइवर और क्लीनर समेत 21 की मौत हो गई। बचाव दल को 18 शव मिल चुके हैं। यह हादसा 8 दिसंबर का है। जानकारी गुरुवार को सामने आई।

दरअसल, हादसे में एक व्यक्ति जीवित बचा था, जो दो दिन तक पैदल चलकर किसी तरह आर्मी कैंप पहुंचा। इसके बाद आज सुबह आर्मी के बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं। टीम को घटनास्थल पर पहुंचने में 10 से ज्यादा घंटे लगे।

हादसे में घायल व्यक्ति खाई से मुश्किल से बाहर निकला और हयुलियांग-चगलगाम रोड पर पहुंचा। दो दिन तक पैदल चलकर दिसंबर की रात चिपरा GREF कैंप तक पहुंचा। यहां उसने जवानों को हादसे की जानकारी दी। इसके बाद गुरुवार सुबह आर्मी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हादसे वाली जगह चगलगाम से लगभग 12 किलोमीटर आगे पहाड़ी और घने जंगल वाला इलाका है। यहां बहुत ही कम आवाजाही होती है।

हयुलियांग-चगलगाम रोड का वह टर्न जहां हादसा हुआ।

हयुलियांग-चगलगाम रोड का वह टर्न जहां हादसा हुआ।

इस रोड की चौड़ाई 10 फीट से भी कम है।

इस रोड की चौड़ाई 10 फीट से भी कम है।

GREF के जवान रस्सियों की मदद से रेस्क्यू के लिए 1000 फीट गहरी खाई में उतरे।

GREF के जवान रस्सियों की मदद से रेस्क्यू के लिए 1000 फीट गहरी खाई में उतरे।

जवानों को नीचे उतरने में चार घंटे लगे।

जवानों को नीचे उतरने में चार घंटे लगे।

शवों को ऊपर लाने के लिए बेले रोप्स बनाते हुए जवान।

शवों को ऊपर लाने के लिए बेले रोप्स बनाते हुए जवान।

ट्रक के टुकड़े मिले।

ट्रक के टुकड़े मिले।

घनी झाड़ियों में फंसा था ट्र्क, आर्मी को खोजने में लगे 4 घंटे

आर्मी की रेस्क्यू टीमें रस्सी से खाई में उतरीं और करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद ट्रक तक पहुंची। दरअसल ट्रक खाई में घनी झाड़ियों में फंसा हुआ था, जिससे यह दूर से नजर नहीं आ रहा था। बचाव टीमों को 18 शव मिल चुके हैं, जिन्हें बेले रोप्स की मदद से ऊपर लाया जा रहा है। मौके पर बचाव टीमें, मेडिकल टीमें, GREF प्रतिनिधि, स्थानीय पुलिस और NDRF की टीमें मौजूद हैं।

अनजॉ के ADC हायुलियांग ने बताया कि जिला परिषद सदस्य और चगलगाम के ठेकेदारों से भी पूछताछ की जा रही है, जिससे कि मजूदरों की पहचान की जा सके।

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