प्रयागराज : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
उन्होंने कहा- यह घटना न केवल हमारी आत्मा को झकझोरने वाली है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जो कहना था, वह वे कह चुके हैं, लेकिन एक बात साफ करना जरूरी है कि कल प्रशासन की ओर से उन्हें एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया था।
इसमें कहा गया था कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर अधिकारियों की मौजूदगी में स्नान कराया जाएगा, लेकिन मन बहुत दुखी है, इसलिए जा रहा हूं। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।
अब तक क्या हुआ, जानिए—
शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। शंकराचार्य की मांग है कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया है।
प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
शंकराचार्य बोले- प्रशासन ने स्नान करने का प्रस्ताव दिया
शंकराचार्य ने कहा- जो कुछ कहना था, वह कहा जा चुका है। फिर भी एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना आवश्यक है कि कल प्रशासन की ओर से, ब्रह्मचारी के माध्यम से तथा हमारे मुख्य कार्याधिकारी श्रीमान चंद्र प्रकाश उपाध्याय द्वारा एक पत्र और प्रस्ताव हमें भेजा गया। इस पत्र में यह कहा गया था कि हमें पूर्ण सम्मान के साथ पालकी द्वारा संगम ले जाकर अधिकारियों की उपस्थिति में स्नान कराया जाएगा।
सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे
- अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- संगम की लहरों में स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंतरात्मा की संस्कृति और आत्मिक चेतना का मार्ग है। लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही इस पावन स्थल से विदा ले रहे हैं। जब हृदय में क्षोभ और पीड़ा हो, तब जल की शीतलता भी मन को शांति प्रदान नहीं कर सकती।
- हम अपने इस वक्तव्य के माध्यम से विशेष रूप से सनातनी समाज, कुंभ मेला प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश शासन तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि न्याय की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आज हम यहां से जा रहे हैं, लेकिन अपने पीछे सत्य की गूंज और कई प्रश्न छोड़कर जा रहे हैं, जो न केवल प्रयागराज की हवा में रहेंगे, बल्कि पूरे विश्व के वायुमंडल में विद्यमान रहेंगे और अपने उत्तर की प्रतीक्षा करेंगे।
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- अत्यंत भारी मन से लौटना पड़ रहा
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- प्रयागराज की यह पावन धरती सदैव धार्मिक शांति, आस्था और आत्मिक शुद्धता का केंद्र रही है। हम यहाँ श्रद्धा और धार्मिक शांति की कामना लेकर आए थे। लेकिन आज इस धरती से हमें अत्यंत भारी मन से लौटना पड़ रहा है। ऐसी घटना घटित हुई है, जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। यह घटना न केवल हमारी आत्मा को झकझोरने वाली है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
फलाहारी बाबा ने CM को खून से लेटर लिखा
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने अपने खून से सीएम योगी को पत्र लिखा है। पत्र में कहा, कि आप हिंदुओं के गौरव हैं और शंकराचार्य जी हिंदुओं के भगवान हैं। PM नरेंद्र मोदी भी इनके पैर छूते हैं, आप दोनों सनातनी संतों के जुबानी युद्ध में सपाई और कांग्रेसी फायदा उठाने के लिए बिलबिला रहे हैं।
माघ मेला में दिख रहे वीडियो से स्पष्ट हो चुका है कि साधु संतों का अधिकारियों के द्वारा अपमान हुआ है तो अधिकारी माफी मांग कर इस प्रकरण को समाप्त कर सकते हैं। आप स्वयं विद्वान सनातनी महंत हैं, शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकने पर गौ हत्या का पाप लगता है।
आप अधिकारियों को माफी मांगने के लिए निर्देशित करने की कृपा करें, जिससे सोशल मीडिया पर सनातनियों द्वारा दिख रही नाराजगी को दूर कर सकें।

फलाहारी बाबा ने CM को खून से लेटर लिखा।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से मारपीट का मामला राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंचा
- माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित मारपीट का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मामले की आयोग से शिकायत की है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
- शिकायत में कहा गया है कि मेला प्रशासन और पुलिस ने शंकराचार्य के धार्मिक काफिले को संगम की ओर जाने से रोका। शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इससे तनाव और अव्यवस्था की स्थिति बन गई।
- जब संतों और अखाड़ों को स्नान और धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दी गई, तो शंकराचार्य के काफिले को रोकना गलत और भेदभावपूर्ण है। अगर भीड़ नियंत्रण या सुरक्षा कारणों से रोक जरूरी थी, तो वह सभी के लिए समान होनी चाहिए थी। भविष्य में ऐसे आयोजनों में संतों और श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए साफ दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

