नई दिल्ली : पीएम मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की बायोग्राफी ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ लॉन्च की। इस दौरान उन्होंने युवाओं से दूसरों के संघर्षों से सीखने और आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा- आज रील्स का दौर है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आपको कहीं और ले जाते हैं, लेकिन इस दौर में भी रेलवे स्टेशनों पर लिखी बात याद रखें कि शॉर्टकट न अपनाएं। शॉर्टकट आपको छोटा कर देगा।

कार्यक्रम में पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद मौजूद रहीं।
PM ने कहा- कोविंद के जीवन से कई बातें सीखने लायक
- कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प से कोई व्यक्ति मुश्किलों को पार कर देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है।
- कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की विरासत बनेगी और नई पीढ़ी इससे बहुत कुछ सीख सकती है।
- राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद कोविंद रुके नहीं हैं और वन नेशन, वन इलेक्शन हल पर काम कर रहे हैं।
- आत्मकथा पढ़ने से उस दौर को समझने का मौका मिलता है, जिसे लेखक ने खुद जिया है। हमें भविष्य में कोविंद जैसे और युवा चाहिए। ऐसे लोग, जो परिस्थितियों से हार न मानें और हर चुनौती का सामना करने का दृढ़ संकल्प रखें।
- आत्मकथा का नाम बिल्कुल सही है। कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही निजी थे, लेकिन उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है।
कोविंद बोले- मैंने गांव से बहुत कुछ सीखा
- मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के एक गांव से आता हूं। मेरे घर की छत से बारिश का पानी अंदर टपकता था।
- आज करोड़ों गरीब परिवारों को सरकारी आवास योजनाओं के तहत पक्की छत मिली है, जिससे उन्हें सम्मान के साथ रहने का अवसर मिला है।
- पीएम मोदी के साथ बातचीत और आम कार्यकर्ताओं से जुड़ने की उनकी क्षमता ने भी मुझे प्रभावित किया।
- मैंने BJP से इसलिए जुड़ना चुना, क्योंकि पार्टी वंशवाद और समुदाय से ऊपर राष्ट्र को प्राथमिकता देती है।

