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सरदर्द का इलाज बना यातना, आयुष्मान कार्ड से निजी अस्पताल की मनमानी उजागर, अब सील हुआ अवैध ग्लोबल हॉस्पिटल

  • अवैध वसूली पर अस्पताल सील, FIR से क्यों बच रहे जिम्मेदार?
  • इलाज नहीं, लूट मिली: आयुष्मान कार्ड भी प्रयोग और मरीज लाखन से करीब 40 हजार की नकद वसूली

दैनिक उजाला, मथुरा : थाना शेरगढ़ क्षेत्र के अगरयाला गांव निवासी लाखन को 12 जनवरी को सिरदर्द की शिकायत पर मथुरा स्थित ग्लोबल प्लस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन इलाज के नाम पर मरीज और परिवार को मानसिक व आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ा।

मरीज के भतीजे विक्रम ने बताया कि करीब 10 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद लाखन की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने अलग-अलग खातों में करीब 40 हजार रुपये नकद वसूले। इतना ही नहीं, मरीज और परिजनों की जानकारी के बिना आयुष्मान भारत कार्ड का भी प्रयोग कर लिया गया।

विक्रम का आरोप है कि जब इलाज से कोई लाभ नहीं हुआ और डिस्चार्ज की मांग की गई तो अस्पताल प्रबंधन ने टालमटोल शुरू कर दी। मजबूर होकर स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन पर अवैध वसूली और जबरन भर्ती रखने की शिकायत की गई, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

काफी मान-मनौव्वल के बाद किसी तरह मरीज को डिस्चार्ज कराकर सोंख रोड स्थित केएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां अब मरीज की हालत में स्पष्ट सुधार बताया जा रहा है।

इसके बाद विक्रम ने पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) मथुरा से की। शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और ग्लोबल प्लस हॉस्पिटल को अब अवैध बताकर सील कर दिया गया।

आयुष्मान कार्ड बना निजी अस्पतालों की लूट का जरिया

सरकारी योजना आयुष्मान भारत गरीबों के इलाज के लिए बनाई गई थी, लेकिन मथुरा में अधिकतर निजी अस्पताल इसे कमाई का साधन बना रहे हैं। ऐसे मामलों से साफ है कि निगरानी तंत्र कमजोर है और निजी अस्पताल खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

CMO की लापरवाही से निजी अस्पतालों की पौ-बारह

स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन पर शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई न होना, CMO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

  • शिकायत के बाद भी तत्काल निरीक्षण नहीं
  • मरीज को राहत मिलने में देरी
  • कार्रवाई तब हुई जब मामला मीडिया और शिकायत तक पहुंचा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती होती, तो मरीज को न तो आर्थिक नुकसान होता और न ही मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती।

अवैध अस्पताल सील, FIR से क्यों बच रहे जिम्मेदार?

अस्पताल को अवैध बताकर CMO मथुरा ने अस्पताल को सील तो कर दिया, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं कराई गई
सवाल यह है कि जब मामला गंभीर आर्थिक शोषण और नियमों के उल्लंघन का है, तो कानूनी कार्रवाई से परहेज क्यों?
क्या सिर्फ सीलिंग से जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो जाएगी?

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