दैनिक उजाला, मथुरा : गरीब और जरूरतमंद मरीजों के मुफ्त इलाज के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना मथुरा में निजी अस्पतालों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। हाल ही में अवैध वसूली के आरोपों में ग्लोबल प्लस हॉस्पिटल को सील किया जाना इस बात का प्रमाण है कि शिकायतें बेबुनियाद नहीं थीं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक अस्पताल को सील कर देने से आयुष्मान कार्ड के नाम पर चल रही लूट रुक जाएगी?
मरीज लाखन के मामले में सामने आया कि बिना परिजनों की जानकारी के आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किया गया, साथ ही अलग-अलग खातों में नकद वसूली भी होती रही। शिकायत के बाद कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं होना यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य विभाग की मंशा आधी-अधूरी कार्रवाई तक ही सीमित है।
स्वास्थ्य सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के मामले केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं हैं। इससे पहले मौर्य ट्रॉमा सेंटर में भी मरीज के इलाज को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। परिजनों ने इस संबंध में CMO मथुरा को कई बार शिकायतें दीं, लेकिन आज तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही मामले की निष्पक्ष जांच सामने आई।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि मरीजों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद CMO कार्यालय से कोई अधिकारी एक दिन के लिए भी मौके पर नहीं पहुंचा। न तो अस्पताल का निरीक्षण किया गया, न मरीज से मुलाकात हुई और न ही परिजनों की बात सुनी गई। इससे यह संदेश गया कि निजी अस्पतालों पर प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब तक आयुष्मान कार्ड के उपयोग की नियमित जांच, अवैध वसूली पर तत्काल FIR और दोषी अस्पतालों की मान्यता रद्द जैसे कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक मरीजों का शोषण यूं ही जारी रहेगा।
- अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या CMO कार्यालय केवल दबाव बनने पर ही कार्रवाई करता है?
- और क्या गरीब मरीजों की शिकायतें तब तक अनसुनी रहती हैं जब तक मामला सार्वजनिक न हो जाए?
आयुष्मान योजना का उद्देश्य राहत देना था, लेकिन वर्तमान हालात में यह योजना निजी अस्पतालों और लापरवाह अधिकारियों के गठजोड़ की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो भरोसे की यह योजना आम मरीजों के लिए सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

