वाराणसी : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी के सीएम योगी के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। शंकराचार्य अब इस विवाद को गोमाता की सियासत पर शिफ्ट करने की तैयारी में जुटे हैं। वह वाराणसी से लखनऊ तक गोमाता को राज्य माता घोषित करने, बीफ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद 12 मार्च को लखनऊ में इसी मांग को लेकर हुंकार भरेंगे।
माघ मेले में विवाद के बाद एक-दूसरे के विरोध में उतरे
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या का स्नान करने से रोके जाने और इसके बाद चोटी खींचकर बटुकों की पिटाई के बाद से शंकराचार्य और सीएम योगी एक-दूसरे पर हमलावर हैं। तब शंकराचार्य ने सीधे सरकार पर हमला बोला था।
बाद में सीएम योगी ने भी बिना नाम लिए शंकराचार्य पर हमला किया था। कहा था कि ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सावधान रहना होगा।
इसके बाद बजट सत्र में योगी ने कहा था- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर वातावरण खराब नहीं कर सकता। उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा। आदि शंकराचार्य की स्थापित 4 पीठों की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा था कि शंकराचार्य बनने के लिए विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदन, मंत्र-भाष्य (थीसिस) और अभिषेक जरूरी है। कोई खुद को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता।
इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाबी हमला बोला था। कहा था, वे फर्जी योगी हैं। ऊपर से कुछ, अंदर से कुछ और… वेशभूषा से ज्यादा आचरण महत्वपूर्ण है। फिर एक बयान में शंकराचार्य ने कहा था कि योगी तो औरंगजेब से भी बुरे हैं।

गोमाता को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की श्रद्धा दिखती रहती है।
गोमाता के नाम पर सरकार को घेरने में जुटे हैं अविमुक्तेश्वरानंद 90 के दशक से ही भाजपा हमेशा से हार्डकोर हिंदुत्व की पिच पर खेलती रही है। 2017 में यूपी में जब भाजपा को बहुमत मिला, तो उसने योगी जैसे हार्ड हिंदुत्व पर चलने वाले चेहरे को सीएम बनाया।
शंकराचार्य भाजपा के इसी हिंदुत्व की पहचान पर हमला कर रहे हैं। वे माघ मेले के अपमान को अब गोमाता की सियासत पर मोड़ने में जुटे हैं। इसके लिए वह सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
अविमुक्तेश्वरानंद 6 मार्च से वाराणसी से लखनऊ तक पदयात्रा पर निकलेंगे। शंकराचार्य ने प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि वह गोमाता को राज्य माता घोषित करें। बीफ का निर्यात बंद करे। ये अल्टीमेटम 6 मार्च को पूरा हो रहा है।
11 मार्च को वह समर्थक संतों और सामान्य जन के साथ लखनऊ पहुंचेंगे। 12 मार्च को आशियाना क्षेत्र में हजारों हिंदुओं के साथ सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे।
यह है पूरा कार्यक्रम:
- 6 मार्च 2026 : काशी शंकराचार्य घाट पर गंगा पूजन, संकल्प (छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर)।
- 7 मार्च से : वाराणसी से पदयात्रा शुरू (संकटमोचन मंदिर पूजा के बाद)।
- यात्रा मार्ग : जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज, बांगरमऊ, बघौली, नैमिषारण्य आदि।
- 11-12 मार्च : लखनऊ पहुंचेंगे। आशियाना क्षेत्र में गौमय गणेश पूजन, गौ-प्रतिष्ठा ध्वज स्थापना, धर्मयुद्ध शंखनाद सभा।
वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं- यह लड़ाई अविमुक्तेश्वरानंद की खुद को स्थापित करने की है। सीएम योगी समेत कई संत उन्हें शंकराचार्य मानने से ही इनकार कर चुके हैं। उनके शंकराचार्य को लेकर विवाद भी है। ऐसे में अविमुक्तेश्वरानंद गोमाता को राज्य माता का दर्जा दिलाने के बहाने दो-तरफा अभियान पर हैं।

