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बंगाल पहुंचे चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, कालीघाट में पूजा की:लोगों ने गो-बैक के पोस्टर, काले झंडे दिखाए; BJP की मांग- 3 फेज में ही कराएं चुनाव

कोलकाता : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों का रिव्यू करने कोलकाता पहुंचे। 3 दिन चलने वाली चुनाव आयोग की फुल बेंच मीटिंग के बीच सोमवार को ज्ञानेश कुमार कालीघाट में पूजा करने पहुंचे।

मंदिर के बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने गो बैक के पोस्टर और काले झंडे दिखाए। इसके पहले रविवार को भी कोलकाता पहुंचने पर कुछ लोग उनके काफिले के सामने झंडे लेकर पहुंचे और नारेबाजी करते दिखे।

इधर, BJP के एक डेलीगेशन ने सोमवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की फुल बेंच से मुलाकात की और मांग की कि 2026 का पश्चिम बंगाल असेंबली चुनाव तीन फेज में ही कराया जाए।

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म होने वाला है। 294 सीटों पर अप्रैल में चुनाव होने की उम्मीद है। 2021 में TMC ने 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। ममता बनर्जी मुख्यमंत्री चुनी गई थीं।

एयरपोर्ट से होटल तक विरोध

रविवार को पश्चिम बंगाल के स्थानीय लोग न्यू टाउन में एक प्राइवेट होटल के सामने इकट्ठा हुए, उन्होंने ‘गो बैक, ज्ञानेश कुमार, डेमोक्रेसी के हत्यारे’ लिखी टीशर्ट पहनी थी। जब चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार, इलेक्शन कमिश्नर SS संधू, विवेक जोशी और सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गार्ड और पवन कुमार के साथ CEC ज्ञानेश कुमार कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे, तो प्रदर्शनकारी वहां भी पहुंच गए।

कोलकाता पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने काफिले की गाड़ियों के पास जाने से रोका।

कोलकाता पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने काफिले की गाड़ियों के पास जाने से रोका।

पोल पैनल से मिला BJP का डेलिगेशन, 16 मांगें रखीं

चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार, इलेक्शन कमिश्नर SS संधू और विवेक जोशी सोमवार को मान्यता प्राप्त नेशनल और स्टेट पार्टियों के डेलीगेशन से मिल रहे हैं ताकि चुनाव कराने के बारे में उनकी चिंताओं और सुझावों को सुना जा सके।

BJP डेलीगेशन ने असेंबली चुनाव से पहले राज्य में सुरक्षा माहौल पर चिंताओं को बताते हुए 16-पॉइंट का मांग पत्र सौंपा। इलेक्शन कमीशन को पश्चिम बंगाल असेंबली चुनाव में हिंसा न हो, इसके लिए कदम उठाने चाहिए।

BJP ने प्रस्ताव दिया कि जिस भी बूथ पर 85 परसेंट से ज़्यादा पोलिंग हो या पिछले चुनावों के दौरान या बाद में हिंसा का रिकॉर्डेड इतिहास हो, उसे अपने आप सेंसिटिव माना जाना चाहिए और उसे एक्स्ट्रा सुरक्षा दी जानी चाहिए।

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