महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रविवार को सुबह करीब 10:30 बजे रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। ट्रॉली में सवार 5 श्रद्धालु 20 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरे। ट्रॉली पहाड़ी की चट्टान से टकराई। हादसे में एक युवती की मौत हो गई है। 4 गंभीर रूप से घायल हैं।
घायलों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सभी को इलाज के लिए बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पलात रेफर किया गया। पांचों लोग चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन माता के दर्शन करने आए थे। दर्शन करके लौटते वक्त हादसा हुआ।

केबल टूटने से ट्रॉली झटके के साथ नीचे गिर गई।

नीचे गिरकर ट्रॉली के पार्ट टूटकर अलग हो गए।

घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया।
दर्शन करके लौटते समय हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्रद्धालु दर्शन करके रोपवे से लौट रहे थे। केबल टूटने के बाद ट्रॉली अनियंत्रित हो गई। लगभग 20 फीट नीचे पहाड़ी की चट्टान से जा टकराई। इस जोरदार झटके के कारण ट्रॉली में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं।
हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु दहशत में आ गए। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया।

स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
नवरात्रि के कारण श्रद्धालुओं की भीड़
चैत्र नवरात्रि के कारण खल्लारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ थी। स्थानीय लोगों ने रोप-वे के नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर इसका मेंटेनेंस किया जाता तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है।

हादसे में घायल लोगों को ट्रॉली से निकालते हुए ग्रामीण।

ट्रॉली गिरने से एक युवती को गंभीर चोटें आई थी।
खल्लारी माता मंदिर जाने के लिए 800 सीढ़ियां
महासमुंद से 25 किलोमीटर दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है। हर साल क्वांर और चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी में दर्शन के लिए आती है।
हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर मेले लगता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत युग में पांडव अपनी यात्रा के दौरान इस पहाड़ी की चोटी पर आए थे।

