प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सोमवार को कोल्ड स्टोरेज की बिल्डिंग ढह गई है। मलबे में 20 लोगों के दबे होने की आशंका है। 5 जेसीबी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। करीब 1 किलोमीटर तक अमोनिया गैस का रिसाव हुआ है।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है। गैस की बदबू के चलते ज्यादातर लोग मुंह पर कपड़ा (रुमाल, गमछा) बांधे हुए हैं। हादसा सोमवार दोपहर ढाई बजे फाफामऊ इलाके में हुआ।
पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर को हिरासत में ले लिया है। उसे थाने लेकर गई है। कोल्ड सपा के पूर्व विधायक स्टोरेज अंसार अहमद का बताया जा रहा। यह करीब 60 एकड़ जमीन में फैला है। यहां 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं।


हादसे के बाद आसपास के 200 से ज्यादा लोग जुट गए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया है।

घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल है। लोग एक युवक को गोद में उठाकर ले जाते नजर आए।

कोल्ड स्टोरेज करीब 60 एकड़ जमीन में फैला है। यहां 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं।
पुलिस कमिश्नर और डीएम मौके पर पहुंचे
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार और डीएम मनीष वर्मा मौके पर पहुंच गए हैं। उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद अफसरों से रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया।
9 घायलों को SRN अस्पताल पहुंचाया गया
एंबुलेंस से 9 घायलों को स्वरूप रानी अस्पताल (SRN) ले जाया गया है। इनमें से ज्यादातर की हालत नाजुक बताई जा रही है।
जिनके घरवाले मलबे में दबे, एक-दूसरे से लिपटकर रोते नजर आए
हादसे में जिनके परिजन मलबे में दबे हैं, वे एक-दूसरे से लिपटकर रोते नजर आए। परिवार वालों ने उन्हें किसी तरह से संभाला।
मलबे से रिश्तेदार को पुलिस ने निकाला तो फूट-फूटकर रोने लगा युवक
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से पुलिस ने एक युवक को निकाला। उसे अस्पताल भिजवाया गया। उसे देखकर युवक का रिश्तेदार फूट-फूटकर रोने लगा।
एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू आपरेशन में जुटी

मलबे में दबे घायलों को निकालकर अस्पताल ले जाती एनडीआरएफ टीम।
लखनऊ रोड पर पूर्व मंत्री का है कोल्ड स्टोर
पूर्व मंत्री अंसार अहमद का लखनऊ रोड पर चांदपुर गांव के सामने आदर्श कोल्ड स्टोर है। सोमवार दोपहर कोल्ड स्टोरेज में आलू रखी जा रही थी। इसी बीच अचानक अमोनिया गैस से भरे टैंक में तेज विस्फोट हुआ।

नाक और मुंह पर बांधे रुमाल-गमछा
अमोनिया टैंक में ब्लास्ट के बाद तेज दुर्गंध से दूर खड़े लोगों का भी सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। इससे बचने के लिए लोगों ने अपनी नाक और मुंह पर रुमाल और गमछा बांध लिया था ताकि गैस का असर उन्हें न हो।

