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Thu. Apr 16th, 2026

बर्खास्त सिपाही ने बुजुर्ग को जिंदा जलाया:हाथरस में खुद को मृत घोषित करने के लिए रची साजिश; हत्या के मामले में फरार चल रहा था

हाथरस : हाथरस में जेल जाने से बचने के लिए हत्यारोपी बर्खास्त सिपाही ने अपनी मौत की झूठी कहानी रच दी। अपना आधार कार्ड, मोबाइल सहित अन्य डॉक्यूमेंट एक व्यक्ति की जेब में रखकर उसे जिंदा जला कर मार डाला।

हालांकि, जिंदा जलाते वक्त आरोपी सिपाही भी बुरी तरह झुलस गया। दो दिन तक चोरी-छिपे हाथरस जिला अस्पताल में अपना इलाज कराता रहा लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

उधर, लाश मिलने और अधजले आधार कार्ड को देखते हुए पहले तो पुलिस ने सिपाही को मृत मान लिया। लेकिन रेलवे स्टेशन पर दिखने वाले एक भिखारी के अचानक गायब होने पर शक हुआ। पुलिस ने सिपाही के गांव में पता लगाया।

इसी दौरान जिला अस्पताल में सिपाही के नाम के गंभीर रूप से झुलसे हुए व्यक्ति के भर्ती होने की सूचना मिली। इस पर पुलिस अलर्ट हुई। जांच-पड़ताल की तो पता चला कि सिपाही जिंदा है और मरने वाला रेलवे स्टेशन के आसपास एरिया में दिखने वाला भिखारी है।

पुलिस के अनुसार, सिपाही ने 12 मार्च को वारदात को अंजाम दिया था। उसकी साजिश के बारे में पता चलने के बाद पुलिस उसके ठीक होने का इंतजार कर रही थी। सैफई मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होने के बाद उसे बुधवार को अरेस्ट किया गया।

आरोपी सिपाही की पहचान मैनपुरी के बघौनी गांव के रामवीर सिंह (55) के रूप में हुई है। उसे 2013 में यूपी पुलिस से बर्खास्त किया गया था। उस पर ड्यूटी के दौरान हत्या समेत 13 मुकदमे दर्ज थे।

पुलिस ने मंगलवार रात रामवीर सिंह को सैफई पीजीआई से अरेस्ट कर लिया।

पुलिस ने मंगलवार रात रामवीर सिंह को सैफई पीजीआई से अरेस्ट कर लिया।

जीआरपी प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- रामवीर सिंह यूपी पुलिस का सिपाही था लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से उसे बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्तगी के बाद वह फरार चल रहा था। पुलिस को उसकी तलाश थी। गिरफ्तारी और जेल से बचने के लिए उसने साजिश रची। वह एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़ रहा था जिसका कोई जानने वाला न हो।

हाथरस प्लेटफार्म पर उसने अपनी ही कदकाठी के एक भिखारी को देखा। भिखारी को देखने के बाद उसने खतरनाक प्लान बनाया। दरअसल, 12 मार्च को हाथरस प्लेटफार्म जब रात में सुनसान हो गया तो उसने अपने प्लान को अंजाम देते हुए सो रहे भिखारी पर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जला दिया। पुलिस को गुमराह करने के लिए अपना अधजला आधार कार्ड, जला हुआ मोबाइल वहीं छोड़ दिया। हालांकि, भिखारी को जिंदा जलाते वक्त बर्खास्त सिपाही भी बुरी तरह झुलस गया।

दो दिन तक सिपाही इधर-उधर मेडिकल स्टोर्स से खरीदकर दवा खाता रहा लेकिन जब जलन बर्दाश्त से बाहर हो गई तो हाथरस जिला अस्पताल में भर्ती हो गया। लेकिन उसकी हालत को देखते हुए 14 मार्च को ही डॉक्टर्स ने उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

12 मार्च को हाथरस रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से मिला था लावारिस भिखारी का जला हुआ शव।

12 मार्च को हाथरस रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से मिला था लावारिस भिखारी का जला हुआ शव।

प्लेटफार्म के भिखारी के गायब होने पर पुलिस को हुआ शक

उधर, पुलिस हाथरस प्लेटफार्म के पास मिली लावारिस जली हुई लाश को रामवीर सिंह मानकर आगे की कार्रवाई करने लगी। हालांकि, उसी दौरान जीआरपी पुलिस को उस समय शक हुआ जब प्लेटफार्म पर दिखने वाला एक भिखारी भी लापता हो गया। स्थानीय लोगों की मानें तो वह भिखारी अमूमन प्लेटफार्म छोड़कर कहीं जाता नहीं था।

इस बात का पता लगते ही पुलिस का शक गहरा गया। पुलिसवाले संदेह पर जांच शुरू कर दिए। मैनपुरी में रामवीर सिंह के गांव में संपर्क किया। इसी बीच जीआरपी थानेदार सुयश सिंह को यह जानकारी मिली कि जिला अस्पताल में रामवीर सिंह नामक एक व्यक्ति जली हालत में आया था और उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

हत्या करने के दौरान रामवीर सिंह खुद ही गंभीर रूप से जल गया।

हत्या करने के दौरान रामवीर सिंह खुद ही गंभीर रूप से जल गया।

बर्खास्त सिपाही के गांव में खुला राज, अरेस्ट के लिए एक महीने इंतजार

पुलिस ने बर्खास्त सिपाही के गांव में भी पता लगाया तो बात पता चली कि मेडिकल कॉलेज में परिवार का कोई भर्ती है, उसी की तीमारदारी में परिजन लगे हुए हैं। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया तो स्पष्ट हो गया कि बर्खास्त सिपाही रामवीर सिंह जीवित है और मेडिकल कॉलेज में झुलसने की वजह से भर्ती है।

पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हो गया कि प्लेटफार्म पर मिली लाश, भिखारी की है। इसके बाद उसका पुलिसवालों ने अंतिम संस्कार करा दिया। उधर, सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती बर्खास्त सिपाही पर पुलिसवाले चुपचाप नजर रखे हुए थे। एक महीना बाद जब उसे मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज किया गया तो उसे अरेस्ट कर हाथरस लाया गया।

जीआरपी इंस्पेक्टर सुयश सिंह ने बताया- पूछताछ में आरोपी बर्खास्त सिपाही ने अपना जुर्म कबूल लिया है। वह भिखारी को जलाकर खुद को मृतक घोषित कराना चाहता था। अगर पुलिस उसकी कहानी सच मान ली होती तो वह आरोप से कहीं और जाकर बस जाता और गिरफ्तारी से बच जाता।

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